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प्रियंका गांधी का नया रोल... इन 3 प्रस्तावों पर 10 दिन के अंदर एक्शन चाहते थे प्रशांत किशोर

Prashant Kishor Congress: कांग्रेस में एंट्री के बाद प्रशांत किशोर अपने प्रस्तावों पर 10 दिन के अंदर एक्शन चाहते थे. इसमें प्रियंका गांधी का नया रोल, कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति आदि शामिल थे. बताया ये भी जा रहा है कि कांग्रेस के नेताओं का प्रशांत किशोर पर भरोसा नहीं बन सका है, जिसके चलते भी उनके प्रस्तावों को स्वीकार में फैसला नहीं हो सका.

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प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)
प्रशांत किशोर और प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)

Prashant Kishor Congress News: मंगलवार का दिन, दोपहर 3 बजकर 41 मिनट का वक्त. कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक ट्वीट किया और पिछले कई दिनों से लगाये जा रहे कयासों का अंत हो गया. यह साफ हो गया कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर कांग्रेस पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं.

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यह खबर आग की तरह मीडिया और लुटियन दिल्ली में फैल गई और बाद में प्रशांत किशोर ने भी ट्वीट कर इसकी पुष्टि कर दी. लेकिन ऐसा क्या हुआ कि जिस गठजोड़ की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोर-शोर से हो रही थी, वह एक झटके में खत्म हो गई?

आजतक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रशांत किशोर-कांग्रेस की डील नहीं होने के पीछे कई वजहें थीं. इसमें प्रशांत किशोर की कुछ शर्तें और उनके द्वारा उठाए गए कुछ कदम इसमें आड़े आए.

यह भी पढ़ें - Prashant Kishor: प्रशांत किशोर की कांग्रेस में एंट्री नहीं, क्या इन शर्तों की वजह से अटकी बात?

जानकार बताते हैं कि पीके और कांग्रेस की बात नहीं बनने के पीछे सबसे बड़ी वजह भरोसे की कमी रही. कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ताओं को प्रशांत किशोर पर भरोसा नहीं था. इसके अलावा प्रशांत किशोर चाहते थे कि प्रियंका गांधी का रोल पार्टी में साफ हो.

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10 दिनों में बदलाव चाहते थे प्रशांत किशोर

कांग्रेस के सीनियर नेता ने बताया कि प्रशांत किशोर चाहते थे कि उनके बताए सुझावों पर 10 दिनों के अंदर काम शुरू हो जाए. इसमें तीन बदलाव प्रमुख थे. पहला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति, महासचिव प्रियंका गांधी का पार्टी में रोल तय करना और संसदीय बोर्ड का पुनर्गठन.

सूत्र बताते हैं कि प्रशांत किशोर की शर्तें कांग्रेस कमेटी को मंजूर नहीं थीं. वे चाहते थे कि पीके पार्टी ज्वाइन करने के बाद कांग्रेस के फ्रेमवर्क के हिसाब से काम करें. लेकिन दूसरी तरफ पीके पूर्ण शक्ति की मांग कर रहे थे.

इतनी शक्ति देने का रिस्क कांग्रेस नहीं उठाना चाहती थी क्योंकि फिलहाल भरोसे की कमी थी. भरोसे में कमी की वजह प्रशांत किशोर का विपक्षी पार्टियों से कनेक्शन था. जैसे तेलंगाना में प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) ने कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी दल TRS (Telangana Rashtra Samithi) से कॉन्ट्रैक्ट किया हुआ है.

 

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