प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने विपक्ष के तंज पर पलटवार करते हुए कहा,'विपक्ष के साथियों ने हमारी सरकार को एक तिहाई सरकार कहा. हां हम मानते हैं कि हम एक तिहाई सरकार हैं, हमारी सरकार के 10 साल हुए हैं और 20 साल अभी बाकी हैं.'
दरअसल, कांग्रेस नेता जयराम रमेश बीजेपी को एक तिहाई सरकार और पीएम मोदी को एक तिहाई प्रधानमंत्री कहकर उन पर तंज कस चुके हैं. पीएम मोदी ने उनके इस तंज पर ही पलटवार किया है.
पीएम मोदी ने बुधवार को संसद में आगे कहा,'60 साल बाद ऐसा हुआ है कि कोई सरकार तीसरी बार वापस आई है. छह दशक बाद हुई ये घटना असामान्य घटना है. कुछ लोग जानबूझकर मुंह फेरकर बैठे रहे. उनको समझ नहीं आया. जिनको समझ आया उन्होंने हो-हल्ला उस दिशा में किया कि देश की जनता की विवेक-बुद्धि पर कैसे छाया कर दिया जाए, इसकी कोशिश हुई.'
पराजय भी कर रहे हैं स्वीकार
प्रधानमंत्री ने आगे कहा,'पिछले दो दिन से देख रहा हूं कि पराजय भी स्वीकार हो रही है, दबे मन से विजय भी स्वीकार हो रही है. कांग्रेस के हमारे कुछ साथियों को हृदय से धन्यवाद करना चाहता हूं कि नतीजे आए तब से एक साथी की तरफ से देख रहा था, उनकी पार्टी समर्थन तो नहीं कर रही थी. लेकिन अकेले झंडा लेकर दौड़ रहे थे.'
सामान्य आदमी आए सियासत में
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,'देशवासियों ने भ्रम की राजनीति को ठुकराया है और भरोसे की राजनीति पर मुहर लगाई है. मेरे जैसे बहुत से लोग हैं, सार्वजनिक जीवन में जिनके परिवार से कोई सरपंच भी नहीं रहा है, राजनीति से कोई सरोकार नहीं रहा है. लेकिन आज महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे हैं. उसका कारण बाबा साहब का दिया संविधान है. हमारे जैसे लोग यहां तक पहुंचे हैं तो उसका कारण संविधान है और जनता ने मुहर लगाई है.'
'संविधान की प्रति लेकर कूदते रहते हैं'
उन्होंने आगे कहा,'संविधान हमारे लिए आर्टिकल्स का संग्रह मात्र नहीं है, उसकी स्पिरिट भी बहुत महत्वपूर्ण है. किसी भी स्थिति में संविधान हमारा मार्गदर्शन करने का काम करता है. मैंने जब लोकसभा में हमारी सरकार की तरफ से कहा गया कि हम 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाएंगे, हैरान हूं कि जो आज संविधान की प्रति लेकर कूदते रहते हैं, उनलोगों ने विरोध किया था कि 26 जनवरी तो है. आज संविधान दिवस के माध्यम से संविधान की भावना, रचना में क्या भूमिका रही है, देश के गणमान्य महापुरुषों ने संविधान में किन कारणों से कुछ चीजों को छोड़ने का निर्णय किया, इसके विषय में स्कूल कॉलेजों में चर्चा हो.'