पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक और फिर पीएम का एयरपोर्ट से सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को दिए गए धन्यवाद संदेश के बाद सियासत गरमा गई है. पंजाब में कांग्रेस की सरकार है और अगले महीने ही विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पीएम की सुरक्षा में चूक लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप को लेकर शह-मात खेल जारी है. इसका राजनीतिक दलों पर क्या सियासी असर पड़ेगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक पर छिड़ी जुबानी जंग बीजेपी के लिए सियासी बूस्टर डोज बनती दिख रही है. जेपी नड्डा, अमित शाह से लेकर भाजपा का शायद ही कोई ऐसा बड़ा चेहरा हो, जिसने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश न की हो. बीजेपी इस सुरक्षा चूक को पंजाब सरकार और कांग्रेस का साझा साजिश बता कर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जान को खतरे में डाला गया. वहीं, कांग्रेस भी दलित कार्ड खेल रही है और सीएम चन्नी इसे कोई चूक नहीं मानते हैं.
बीजेपी का क्या प्लान?
बीजेपी नेताओं के सारे बयानों को देखें तो साफ जाहिर होता है कि पीएम की सुरक्षा चूक को लेकर जिस तरह से कांग्रेस को घेरा है. इसके जरिए बीजेपी की यह संदेश देने की कोशिश है कि कांग्रेस सरकार ने पीएम मोदी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का काम किया. पीएम की सुरक्षा में चूक भले ही पंजाब में हुई हो, लेकिन इसकी गूंज और सियासी असर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में भी सुनने और प्रभाव डालती दिखेंगी.
पंजाब के साथ ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में चुनाव होने हैं. चुनाव आयोग इसी महीने एक साथ पांच राज्यों के चुनाव का औपचारिक ऐलान कर सकता है. पांच राज्यों में से 4 में बीजेपी की सरकार और पंजाब में कांग्रेस की सरकार है. पीएम की सुरक्षा से चूक की घटना ऐसे वक्त में हुई, जब चुनावी सरगर्मियां तेज हैं.
इन नेताओं ने भी कांग्रेस को घेरा
ऐसे में इस घटना ने एक सहानुभूति को हासिल करने का मौका जरूर हाथ लग गया है. पीएम की सुरक्षा चूक को लेकर बसपा प्रमुख मायावती से लेकर पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा तक ने भी चिंता चाहिर की है. इसके अलावा कांग्रेस के कई नेताओं ने भी चन्नी सरकार को घेरा है.
प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे के दौरान 'सुरक्षा चूक' को लेकर आलोचना का सामना कर रहे सीएम चरणजीत सिंह चन्नी सारे आरोपों को सिरे से खारिज रहे हैं. वो कहते हैं कि पीएम को जान का कोई खतरा नहीं था, बल्कि फिरोजपुर की रैली में लोगों की संख्या कम होने के कारण उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द किया.
उन्होंने कहा कि रैली में खाली कुर्सियों के कारण प्रधानमंत्री 'सुरक्षा खतरे के तुच्छ कारण' का हवाला देते हुए वापस चले गए. सीएम चन्नी ने कहा कि पंजाब को बदनाम करने के लिए किया गया. वहीं, राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सहित कई कांग्रेसी नेताओं ने दलित कार्ड खेलते हुए कहा कि बीजेपी को एक दलित सीएम बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
कांग्रेस को क्या फायदा?
कांग्रेस भले ही कह रही हो कि पीएम की सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई और असल में जिस रैली में शामिल होने के लिए वे जा रहे थे, उसमें भीड़ नहीं थी, इसलिए उसे रद्द कर यह सारा बहाना बनाया गया. लेकिन बीजेपी ने पीएम की सुरक्षा में चूक के मुद्दे को लेकर आक्रमक रुख अपना रखा है, वो कांग्रेस पर भारी पड़ती दिख रही है. पंजाब में राष्ट्रपति शासन की भी मांग उठाई जा रही है.
पंजाब में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच माना जा रहा हो, लेकिन बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर सिंह की दोस्ती चुनावी समर को त्रिकोणीय बनाने में जुटी है. वहीं, पंजाब में किसानों की नाराजगी के मद्देनजर पीएम का दौरा का रद्द होना कांग्रेस के लिए सियासी फायदा दिला सकता है. इसीलिए कई कांग्रेसी नेताओं ने ट्वीट कर कहा था, 'हाउ इज द जोश.'
राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो पंजाब की सियासत में इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है. किसान और सिख वोटर बीजेपी से नाराज है. ऐसे में पीएम मोदी को पंजाब में रैली न करना और वापस चले जाने से पंजाब के किसानों को हौसले बुलंद हैं. वहीं, पंजाब में हिंदू वोटर है, जो किसी न किसी तरह से आम आदमी पार्टी के पाले में चला गया है, उसकी बीजेपी के साथ सहानुभूति बढ़ सकती है. इसके अलावा यूपी, उत्तराखंड में बीजेपी के लिए संजीवनी साबित होगा.
उत्तराखंड में बदलेगी तस्वीर?
उत्तराखंड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है. ऐसे में बीजेपी इस ऐसे ही मुद्दा बनाए रखने की कोशिश करेगी. चुनाव के दौरान अगर पार्टी नेता और मोदी इस बात का जिक्र करते हैं तो कांग्रेस के लिए काफी बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है. कांग्रेस उत्तराखंड के सत्ता परिवर्तन की रवायत को देखते हुए अपनी वापसी की जो उम्मीदें लगाई बैठी है, उसके लिए बड़ा सियासी झटका साबित हो सकता. यही वजह है कि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने कांग्रेस को घेरा और चन्नी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की.
पुष्कर सिंह धामी कहा कि यह लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है. कांग्रेस ने हमेशा लोकतंत्र को खत्म करने का काम किया है. पीएम की सुरक्षा में जो घोर लापरवाही बरती गई और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने वहां पर किसी का फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा, इसको बर्दाश्त नहीं करेंगे. लोकतंत्र के काले अध्याय में हमेशा इसको रखा जाएगा. निश्चित रूप से बहुत बड़ी साजिश थी, घोर लापरवाही की जितनी निंदा की जाए वह कम है. कांग्रेस को इसका जवाब देना होगा.
वहीं, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस चुनावी लड़ाई में नहीं, यहां मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच माना जा रहा है. इसके बावजूद बीजेपी नेता पीएम की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, जिसके जरिए एक बड़ा संदेश देने की रणनीति है. सीएम योगी ने कांग्रेस को घेरा है और कहा कि कांग्रेस शासित पंजाब की सरकार को देश की जनता से इस बात के लिए माफी मांगनी चाहिए. ऐसे में देखना है कि इसका सियासी फायदा कितना और किसे मिलता है?