राजस्थान की छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. उपचुनाव के लिए तारीखों का ऐलान भी नहीं हुआ है और सूबे की सियासी हवा में गर्माहट आ गई है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल अपने लिए लिटमस टेस्ट माने जा रहे उपचुनाव से पहले राजस्थान की हवा भांपने मैराथन दौरे कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस की ओर से भी सचिन पायलट ने कमान संभाल रखी है. बीजेपी और कांग्रेस के बीच की ये फाइट इन दिनों पायलट बनाम अग्रवाल हो गई है.
राजस्थान दौरे पर पहुंचे बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने सचिन पायलट को स्पेंट फोर्स बताते हुए कहा कि उनका जमाना अब खत्म हो चुका है. आज राजस्थान में बीजेपी की सरकार है. प्रदेश की जनता के दिलों में केवल बीजेपी है. राधा मोहन के बयान के बाद यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और जयपुर से उदयपुर तक विरोध-प्रदर्शन किया. जयपुर में बीजेपी प्रदेश कार्यालय के बाहर पोस्टर पर राधामोहन की तस्वीर पर, उदयपुर में बीजेपी प्रभारी की गाड़ी का घेराव कर स्याही फेंकी.
उदयपुर की घटना पर नाराजगी जताते हुए राजस्थान बीजेपी के प्रभारी ने कहा कि ऐसी घटना दोबारा हुई तो बीजेपी कार्यकर्ताओं का धैर्य भी टूट सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुझे राजस्थान में खरोंच भी आई तो सचिन पायलट जिम्मेदार होंगे. सचिन पायलट ने बीजेपी प्रभारी का नाम लिए बगैर भाषा की मर्यादा याद दिलाते हुए राजस्थान को अतिथि देवो भवः की भूमि बताया और कहा कि हमने भी बड़े-बड़े नेताओं का वैचारिक विरोध किया है लेकिन भाषा के स्तर, मर्यादा और गरिमा का हमेशा खयाल रखा है. पायलट ने ये भी कहा कि उपचुनाव में पता चल जाएगा कि कौन कितने पानी में है.
राजस्थान में पायलट बनाम अग्रवाल क्यों?
राधामोहन दास अग्रवाल से पहले कुछ ऐसा ही बयान राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे सीपी जोशी ने भी दिया था. राजस्थान बीजेपी का अध्यक्ष रहते सीपी जोशी ने करीब महीनेभर पहले कहा था कि सचिन पायलट बीजेपी के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं हैं. बीजेपी उपचुनाव में सूबे की सभी सीटें जीतेगी. सीपी जोशी ने ये बयान टोंक में ही दिया था जहां से सचिन पायलट विधायक हैं. अब राधामोहन दास अग्रवाल के बयान पर हंगामा बरपा हुआ है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि उपचुनाव की ये लड़ाई बीजेपी बनाम कांग्रेस से अधिक अग्रवाल बनाम पायलट क्यों हो गई है? इसे चार पॉइंट्स में समझा जा सकता है.
1- उपचुनाव में पायलट के प्रभाव वाली सीटें
राजस्थान की छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं- उनियारा, दौसा, खींवसर, चौरासी, झुंझुनू और सलूंबर. इन छह में से पांच सीटें विपक्षी दलों के पास थीं. आरएलपी के हनुमान बेनीवाल खींवसर और भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत चौरासी विधानसभा सीट से विधायक थे जो अब सांसद बन चुके हैं. उनियारा, देवसर और झुंझूनू सीट कांग्रेस ने जीती थी और ये तीनों ही सीटें सचिन पायलट के प्रभाव क्षेत्र की हैं. अमृतलाल मीणा के निधन से रिक्त हुई सलूंबर सीट बीजेपी के कब्जे में थी. कांग्रेस के कब्जे वाली तीनों सीटें पायलट के प्रभाव वाली हैं. बीजेपी ने राजस्थान चुनाव जीतकर सूबे में बहुमत की सरकार बना ली लेकिन पायलट का किला भेदने में पार्टी असफल रही थी.
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2- पायलट समर्थकों की सीट पर उपचुनाव
राजस्थान चुनाव में उनियारा विधानसभा सीट से हरिश्चंद्र मीणा, दौसा से मुरारीलाल मीणा और झुंझुनू से बृजेंद्र ओला चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. अब सांसद बन चुके इन तीनों नेताओं की गिनती पायलट समर्थकों में होती है. पायलट समर्थकों के इस्तीफे से रिक्त हुई सीटों के उपचुनाव में कांग्रेस से अधिक सचिन पायलट की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. पायलट के सामने अपना किला बचाने की चुनौती है. राजस्थान बीजेपी के प्रभारी सचिन पायलट को टार्गेट कर रहे हैं तो इसके पीछे भी यह एक प्रमुख वजह बताई जा रही है.
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3- पायलट राजस्थान कांग्रेस के फ्यूचर फेस
सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार रहे हैं. हालिया लोकसभा चुनाव में बीजेपी का क्लीन स्वीप का सिलसिला टूटने के बाद पायलट का कद पार्टी में और बढ़ा है. राजस्थान की 25 में से आठ सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे. तीन सीटों पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को जीत मिली थी. कांग्रेस के फ्यूचर फेस पायलट को लेकर बीजेपी नेताओं के हालिया बयान यही संकेत कर रहे हैं कि पार्टी ने अभी से ही उन्हें घेरने की रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है.
4- उपचुनाव अग्रवाल का लिटमस टेस्ट
बीजेपी ने अभी पिछले ही महीने राधामोहन दास अग्रवाल को राजस्थान के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी. लोकसभा चुनाव में 11 सीटें गंवाने वाली बीजेपी और अग्रवाल के लिए ये उपचुनाव लिटमस टेस्ट की तरह भी देखे जा रहे हैं. खासकर तब, जब राजस्थान बीजेपी में गुटबाजी की खबरें आम हैं. सीएम नहीं बनाए जाने के बाद वसुंधरा राजे और उनका गुट नाराज बताया जा रहा है तो अभी चार दिन पहले ही 24 अगस्त को राजेंद्र राठौड़ के समर्थकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'राठौड़ नहीं तो बीजेपी नहीं' हैशटैग ट्रेंड करा दिया था.