राज्यसभा में पास खेती बाड़ी से जुड़े नए विधेयकों को लेकर विपक्ष के बढ़ते विरोध के बीच केंद्र सरकार ने कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने का फै़सला किया है. कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने इसे मंज़ूरी दी है. रबी की छह फसलों की नई एमएसपी जारी की गई है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब नए कृषि बिलों को लेकर किसान संगठन प्रोटेस्ट कर रहे हैं. विपक्ष और किसान संगठनों का मानना है कि नए कृषि विधेयकों से मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर असर पड़ेगा.
इस बीच, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर मोदी सरकार को घेरा है. राहुल गांधी ने कहा कि 2014 में मोदी ने चुनावों में किसानों से स्वामीनाथन कमिशन वाला MSP देने का वादा किया था. लेकिन 2015 में मोदी सरकार ने कोर्ट में कहा कि वह ऐसा नहीं कर पाएंगे. 2020 में वह काला कानून लेकर आए हैं.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंस कसा. उन्होंने कहा कि मोदी की नीयत साफ है. कृषि-विरोधी नया प्रयास, किसानों को करके जड़ से साफ, पूंजीपति ‘मित्रों’ का ख़ूब विकास.
2014- मोदी जी का चुनावी वादा किसानों को स्वामीनाथन कमिशन वाला MSP
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 22, 2020
2015- मोदी सरकार ने कोर्ट में कहा कि उनसे ये न हो पाएगा
2020- काले किसान क़ानून
मोदी जी की नीयत ‘साफ़’
कृषि-विरोधी नया प्रयास
किसानों को करके जड़ से साफ़
पूँजीपति ‘मित्रों’ का ख़ूब विकास।
धरने पर डटे रहे सांसद
बहरहाल, कृषि बिलों का विरोध करने वाले जिन 8 सांसदों को राज्यसभा से निलंबित किया गया है वो सोमवार की पूरी रात धरने पर डटे रहे. मंगलवार को राज्यसभा में विपक्षी दलों के 8 सांसदों के निलंबन वापस लेने की मांग की गई. विपक्ष सभापति के फैसले का विरोध कर रहा है. कांग्रेस ने इन सांसदों की बहाली की मांग की है.
विपक्ष से सभापति की अपील
राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन की कार्यवाही की बहिष्कार करने वाले वाले विपक्षी दलों से वापस लौटने की अपील की. उन्होंने कहा कि विपक्षी दल लौट आएं और सदन की कार्यवाही में हिस्सा लें. लेकिन राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह तभी होगा जब 8 सांसदों को बहाल किया जाएगा.
किसानों के लिए कांग्रेस की शर्त
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम संसद सत्र का बहिष्कार करेंगे जब तक कि सरकार हमारी 3 मांगों को स्वीकार नहीं करती है. उन्होंने कहा कि सरकार को एक और विधेयक लाना चाहिए जिसमें यह प्रावधान हो कि कोई भी प्राइवेट कंपनी तय कीमत यानी एमएसपी नीचे खरीद नहीं करेगी. दूसरा, स्वामीनाथन आयोग के फार्मूला के मुताबिक एमएसपी तय की जानी चाहिए. एफसीआई जैसी सरकारी एजेंसियों को एमएसपी से नीचे की फसल नहीं खरीदनी चाहिए.