लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में कहा कि दलित, आदिवासी या ओबीसी समुदाय से कोई भी महिला मिस इंडिया की लिस्ट में शामिल नहीं है. उन्होंने जाति जनगणना कराने के महत्व को दोहराते हुए कहा कि यह सिर्फ एक जनगणना नहीं है बल्कि नीति निर्धारण का आधार है.
'जाति जनगणना नीति निर्माण का आधार'
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संविधान सम्मान सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, '90 प्रतिशत लोग सिस्टम का हिस्सा नहीं हैं. उनके पास कौशल है, प्रतिभा है, ज्ञान है लेकिन उनका सिस्टम से कनेक्शन ही नहीं है. यही कारण है कि हम जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं. बीजेपी नेता कह रहे हैं कि जाति जनगणना के बाद ओबीसी सेक्शन दे दिया जाएगा. हम विभिन्न समुदायों की सूची चाहते हैं.'
उन्होंने कहा, 'हमारे लिए जाति जनगणना सिर्फ एक जनगणना नहीं है, यह नीति निर्माण का आधार है. सिर्फ जातिगत जनगणना कराना काफी नहीं है, यह समझना जरूरी है कि देश में धन का वितरण कैसे हो रहा है. यह भी पता लगाना जरूरी है कि ब्यूरोक्रेसी, जूडिशरी, मीडिया में ओबीसी, दलित और श्रमिकों की भागीदारी कितनी है?'
'मिस इंडिया की लिस्ट में कोई दलित, आदिवासी महिला नहीं'
राहुल गांधी ने कहा, 'मैंने मिस इंडिया की लिस्ट चेक की और पाया कि इसमें कोई दलित, आदिवासी या ओबीसी महिला नहीं थी. फिर भी मीडिया डांस, म्यूजिक, क्रिकेट, बॉलीवुड के बारे में बात करता है लेकिन किसानों और मजदूरों के बारे में बात नहीं करता है.'
लोकसभा चुनाव कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो जातियों, उप-जातियों और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों की गणना के लिए देशव्यापी सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना कराई जाएगी.
वित्तीय सर्वे का किया था वादा
अप्रैल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि अगर कांग्रेस केंद्र में सरकार बनाती है, तो वह देश में लोगों के बीच धन के वितरण का पता लगाने के लिए एक वित्तीय और संस्थागत सर्वेक्षण कराएगी. हालांकि राहुल गांधी के वादे पर पीएम मोदी ने निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि कांग्रेस देश की संपत्ति 'घुसपैठियों' और 'जिनके ज्यादा बच्चे हैं' उनमें बांटना चाहती है.