scorecardresearch
 

राजस्थान के नतीजे ने बीजेपी को चौंकाया... क्या जाट, गुर्जर और मीणा की नाराजगी भारी पड़ी?

राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने सूबे के जातिगत समीकरण को ठीक से नहीं साधा. पार्टी को लगा कि जातिगत समीकरण से उठने वाले सवालों को भी मोदी के चेहरे पर सुलझा लेंगे.

Advertisement
X
राजस्थान में बीजेपी को भारी पड़ी जातियों की नाराजगी (फाइल फोटो/PTI)
राजस्थान में बीजेपी को भारी पड़ी जातियों की नाराजगी (फाइल फोटो/PTI)

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भारतीय जनता पार्टी को राजस्थान (Rajasthan) में बड़ा सेटबैक लगा है. दो बार 25 की 25 सीटें जीतने वाली बीजेपी को इस बार केवल 14 सीटें मिली हैं. इसके बाद बची सीटों में से 8 कांग्रेस और 3 गठबंधन दलों के हिस्से गईं. जो 14 सीटें बीजेपी को मिली हैं, उसमें भी जयपुर को छोड़कर 13 में पिछली बार के मुकाबले वोट शेयर गिरे हैं. मगर सवाल उठता है कि 6 महीने में ऐसा क्या हो गया कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी 115 सीटें जीती थी और आम चुनाव में बुरी स्थिति हो गई. 

दरअसल विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने राजस्थान के जातिगत समीकरण को ठीक से नहीं साधा. उन्हें लगा कि मोदी के चेहरे पर जातिगत समीकरण से उठने वाले सवालों को भी वो सुलझा लेंगे. दरअसल ये कांग्रेस का मोमेंट कम, जाट, गुर्जर और मीणा जैसी बड़ी कृषक जातियों की नाराजगी से ज्यादा बड़ा है. 

जाट फैक्टर

बीजेपी राज्य में अपने बूते पर 2004 में पहली बार वसुंधरा राजे की अगुआई में सरकार बना पाई क्योंकि कांग्रेस के सबसे मजबूत वोट बैंक जाटों को ओबीसी में शामिल कर आरक्षण देकर मास्टर स्ट्रोक खेला. 

मगर इस बार जैसे ही बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद से सतीश पुनिया को हटा कर ब्राह्मण सीपी जोशी को बनाया, इसे लेकर जाटों में नाराजगी बढ़ गई. उसके बाद चुरू लोकसभा से सासंद राहुल कस्वा का टिकट कटवाने का आरोप बीजेपी के बड़े नेता राजेंद्र राठौड़ पर लगा, जिससे शेखावटी में जाटों में बीजेपी के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई. कांग्रेस ने शेखावटी इलाके से जाट नेता गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जाटों का वोट बैंक और मजबूत किया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: राजस्थान में किस पार्टी ने कितनी सीटें जीतीं?

कम्युनिस्ट पार्टी में ज्यादातर जाट नेता हैं. सीकर सीट पर सीपीएम से गठबंधन का फायदा कई सीटों पर जाट वोट बैंक बनने में मिला. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल का INDIA गठबंधन में साथ आने से भी कांग्रेस का जाट वोट मजबूत हुआ. इंडिया गठबंधन के आठ में से पांच जाट नेता जीते हैं. 

गुर्जर फैक्टर

विधानसभा चुनावों में गुर्जरों ने कांग्रेस के खिलाफ वोट दिया था क्योंकि गुर्जर वोटरों की नाराजगी इस बात से थी कि अशोक गहलोत की वजह से सचिन पायलट राजस्थान के मुख्यमंत्री नहीं बन पाए. गुर्जर वोट से बीजेपी सत्ता में आयी मगर एक भी गुर्जर कैबिनेट मंत्री या स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री नहीं बन पाया जबकि कांग्रेस सरकार में 2 -2 गुर्जर कैबिनेट मंत्री थे. गुर्जर विधायकों की हैसियत भी काफी ज्यादा थी. 

यह भी पढ़ें: क्षत्रिय समाज की नाराजगी पड़ी BJP को भारी? UP-राजस्थान में सीटें कम होने के ये हैं कारण

इस विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट की वजह से गुर्जर वोटरों ने जमकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया. सचिन पायलट राजस्थान के एकमात्र ऐसे लोकप्रिय नेता हैं, जो अपनी जाति के वोट किसी भी अन्य जाति के उम्मीदवार को ट्रांसफर करा सकते हैं. 

Advertisement

इंडिया गठबंधन के जीते 11 उम्मीदवारों में से सचिन पायलट के पांच समर्थकों ने जीत हासिल की है. 

मीणा फैक्टर

राजस्थान में परंपरागत रूप से मीणा कांग्रेस के वोटर रहे हैं. मगर पिछले विधानसभा चुनाव में पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर मीणा समाज ने कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी के पक्ष में वोट किया था. इसकी बड़ी वजह बीजेपी के कद्दावर नेता डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा भी थे. 

लेकिन सत्ता में आने के बाद डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा को कोई बड़ा मंत्रालय नहीं मिला और जो कृषि मंत्रालय या ग्रामीण विकास मंत्रालय मिला उसे भी काट-छांट दिया गया. इस वजह से मीणा समाज में नाराजगी रही. सचिन पायलट की वजह से पूर्वी राजस्थान में मीणा और गुर्जर समाज ने एक साथ वोटिंग की. मीणा और गुर्जर समाज एक साथ अगर वोटिंग करता है, तो पूर्वी राजस्थान की सभी सीटें कोई भी पार्टी अकेले जीत सकती है. 

यह भी पढ़ें: राजस्थान: भरतपुर में कांग्रेस प्रत्याशी संजना जाटव ने ऐसे मनाया जीत का जश्न, कार्यकर्ताओं संग लगाए ठुमके

एससी फैक्टर

इस बार दलित और आदिवासी समुदाय में जिस तरह से भ्रम फैला कि अगर बीजेपी जीतेगी तो संविधान बदल जाएगा, उसे लेकर इस समुदाय में डर बैठ गया. बड़ी संख्या में दलितों और आदिवासियों ने बीजेपी के खिलाफ वोट किया. इसके अलावा धौलपुर, करौली और भरतपुर जैसे लोकसभा क्षेत्रों में जहां पर जाटव समुदाय के दोनों उम्मीदवार कांग्रेस से जीते हैं, वहां पर बहुजन समाज पार्टी के जाटव वोट बैंक में कांग्रेस ने सेंध लगाया है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी इस इलाके में बेहद कमजोर हुई है. 

Advertisement

किसान आंदोलन और अग्निवीर योजना भी इसकी वजह रही. श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ लोकसभा क्षेत्रों में सिख समुदाय ने बड़ी संख्या में इस बार कांग्रेस को वोट दिया है. जबकि यहां पर सिख समुदाय परंपरागत रूप से बीजेपी का कट्टर वोटर रहा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement