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मनोज झा बनाम हरिवंश: जानें राज्यसभा उपसभापति का चुनाव कैसे होता है?

राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए चुनाव में एनडीए की ओर से जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर से उम्मीदवार हैं. वहीं, विपक्ष की ओर से आरजेडी के सांसद मनोज झा मैदान में हैं. उपसभापति के लिए 20वीं बार चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 14 बार सर्वसम्मति से चुनाव हुआ, जबकि महज 6 बार सदन में वोटिंग की नौबत आई है. ऐसे में हम बताते हैं कि कैसे उपसभापति पद के लिए चुनाव होते हैं.

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हरिवंश सिंह और मनोज झा दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि बिहार है
हरिवंश सिंह और मनोज झा दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि बिहार है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राज्यसभा उपसभापति पद के लिए आज चुनाव
  • एनडीए से हरिवंश सिंह और विपक्ष से मनोज झा
  • उपसभापति के लिए 20वीं बार हो रहा है चुनाव

देश की संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में आज (सोमवार) उपसभापति पद के लिए चुनाव है. उप सभापति पद के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं. एनडीए की ओर से जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर से उम्मीदवार हैं. वहीं, विपक्ष की ओर से आरजेडी के सांसद मनोज झा मैदान में हैं. हरिवंश सिंह और मनोज झा दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि बिहार है.

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हरिवंश के समर्थन वाले दल
245 सदस्यों के सदन में बीजेपी के 87 सदस्य हैं, जबकि एनडीए के सदस्यों की संख्या 116 है. इनमें बीजपी 87, एआईडीएमके 9, जेडीयू 5, अकाली दल 3, एजेपी 1, बीपीएफ 1, आरपीआई 1, एनपीएफ 1, एमएनएफ 1, एनपीपी के 1 और नामित सदस्य 7 को मिलाकर कुल 116 सदस्यों का समर्थन हासिल है. हालांकि, राज्यसभा के 245 सदस्यों के सदन में जीत के लिए हरिवंश सिंह को 123 वोट चाहिए. ऐसे में एनडीए को उम्मीद है कि टीआरएस 7, वाईएसआर 6 और बीजेडी के 9 सदस्यों का समर्थन जुटा लेंगे. 


मनोज झा के पक्ष वाले दल
राज्यसभा उपसभापति के चुनाव के लिए आरजेडी के मनोज झा के समर्थन में एक दर्जन से ज्यादा दल आए हैं. कांग्रेस 40, वामपंथी दल 6, डीएमके 7, आरजेडी, 5, शिवसेना 3, एनसीपी 4, मुस्लिम लीग 1, जेडीएस 1, जेएमएम 1, केरला कांग्रेस 1 और टीडीपी के 1 राज्यसभा सदस्य का समर्थन हासिल है. इसके अलावा सपा 8, टीएमसी 13, पीडीपी 2 और नेशनल कॉफ्रेंस 1 भी पक्ष में है. विपक्ष डॉ. मनोज झा को आगे करके कुछ ऐसी पार्टियों को साथ लेने की कोशिश कर रहा है जो औपचारिक रूप से एनडीए के सदस्य नहीं है लेकिन कई मौके पर एनडीए के पक्ष में खड़े रहते हैं. इसमें बीजेडी, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस है. इसके अलावा मनोज झा की नजर बसपा 4 और आम आदमी पार्टी के 3 सांसदों को भी साधने की है. 

कैसे होता है उपसभापति का चुनाव
बता दें कि राज्यसभा का उपसभापति एक संवैधानिक पद है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 89 में कहा गया है कि राज्यसभा अपने एक सांसद को उपसभापति पद के लिए चुन सकता है, जब यह पद खाली हो. उपसभापति का पद इस्तीफा, पद से हटाए जाने या इस पद पर आसीन राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो जाता है.
उपसभापति हरिवंश नारायण का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था, जिसके चलते उप सभापति पद के लिए चुनाव हो रहा है. 2018 में हरिवंश के खिलाफ कांग्रेस ने बीके हरिप्रसाद को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह जीत नहीं सके थे. इस बार हरिवंश सिंह के खिलाफ संयुक्त विपक्ष के तौर पर आरजेडी सांसद मनोज झा मैदान में है. 

उपसभापति चुनाव का नियम
राज्यसभा उपसभापति का चुनाव करने की प्रक्रिया बहुत ही सहज और सरल है. कोई भी राज्यसभा सांसद इस संवैधानिक पद के लिए अपने किसी साथी सांसद के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकता है. इस प्रस्ताव पर किसी दूसरे सांसद का समर्थन भी जरूरी है. इसके साथ ही प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले सदस्य को सांसद द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा प्रस्तुत करनी होती है जिनका नाम वह प्रस्तावित कर रहा है. 
इसमें इस बात का उल्लेख रहता है कि निवार्चित होने पर वह उपसभापति के रूप में सेवा करने के लिए तैयार हैं. प्रत्येक सांसद को केवल एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाने या उसके समर्थन की अनुमति है. वहीं, अगर किसी प्रस्ताव में एक से ज्यादा सांसद के नाम हैं तो इस स्थिति में सदन का बहुमत तय करेगा कि कौन राज्यसभा के उपसभापति के लिए चुना जाएगा. अगर सभी राजनीतिक दलों में किसी एक सांसद के नाम को लेकर आम सहमति बन जाती है, तो इस स्थिति में सांसद को सर्वसम्मति से राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया जाएगा.

उपसभापति का 20वीं बार चुनाव
राज्यसभा उपसभापति को पूरी तरह से राज्यसभा के सांसद ही निवार्चित करते हैं. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पद है. राज्यसभा उपसभापति पद के लिए यह 20वीं बार चुनाव हो रहा. इनमें से 14 मौकों पर सर्वसम्मति से इस पद के लिए उम्मीदवार को चुन लिया गया था, मतलब चुनाव की नौबत ही नहीं आई. वहीं, छह बार ऐसे मौके आए हैं जब इस पद के लिए वोटिंग की प्रक्रिया करनी पड़ी है. 1969 में पहली बार उपसभापति के पद के लिए चुनाव हुआ था, जिनमें भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के भाऊराव देवाजी खोब्रागडे चुने गए थे. 

उपसभापति की भूमिका
राज्यसभा की अध्यक्षता देश के उपराष्ट्रपति करते हैं. मौजूदा समय में वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष हैं. उच्च सदन में एक सभापति होते हैं और एक उपसभापति भी होते हैं, जिसे राज्यसभा के सदस्य मिलकर चुनते हैं. 
उपसभापति को सभापति/उपराष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में राज्यसभा का संचालन करना होता है. इसके साथ ही इस पद पर आसीन सांसद को तटस्थता के साथ उच्च सदन की कार्यवाही को भी सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है. किसी भी बिल को पास कराने के लिए वोटिंग हो रही है तो उसकी देखरेख भी ये ही करते हैं. संवैधानिक नियम के मुताबिक ये किसी भी राजनीतिक पार्टी का पक्ष नहीं ले सकते हैं, वो फिर उनकी ही पार्टी क्यों न हो? 
संसद सत्र के दौरान सदन में हंगामा होने या किसी भी वजह से सदन को स्थगित करने का अधिकार अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को ही होता है. राज्यसभा के किसी सदस्य के इस्तीफे को मंजूर या नामंजूर करने का अधिकार अध्यक्ष का उपाध्यक्ष को ही होता है. इस तरह से उच्च सदन के सभापति और उपसभापति का पद संवैधानिक और अहम माना जाता है. 

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