राज्यसभा से निलंबित आठ सांसदों ने सोमवार रातभर संसद परिसर में धरना दिया. सुबह राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश उनसे मिलने के लिए पहुंचे. वह निलंबित सांसदों के लिए चाय-नाश्ता लेकर पहुंचे थे लेकिन सांसदों ने इसे लेने से मना कर दिया. हालांकि अब सांसदों का धरना खत्म हो चुका है, और विपक्षी दलों ने राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया है.
इन सब घटनाक्रमों के दौरान राज्यसभा में विपक्षी दलों के नेताओं और सभापति एम. वैंकेया नायडू के बीच दिलचस्प बहस देखने को मिली. इसमें दोनों पक्षों ने दिवंगत केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का जिक्र किया.
असल में, गुलाम नबी आजाद विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन वापस लेने की मांग कर रहे थे. वहीं राज्यसभा के सभापति एम वैंकेया नायडू ने सदन की कार्यवाही की बहिष्कार करने वाले वाले विपक्षी दलों से वापस लौटने की अपील की. उन्होंने कहा कि विपक्षी दल लौट आएं और सदन की कार्यवाही में हिस्सा लें. लेकिन गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह तभी होगा जब 8 सांसदों को बहाल किया जाएगा.
गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'हम संसद सत्र तब तक बहिष्कार करेंगे जब तक सरकार हमारी 3 मांगों को मान नहीं लेती. उन्होंने कहा कि सरकार को एक और विधेयक लाना चाहिए जिसमें यह प्रावधान हो कि कोई भी प्राइवेट प्लेयर तय कीमत यानी एमएसपी से नीचे किसानों की उपज की खरीद नहीं कर पाए. दूसरा, स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के मुताबिक एमएसपी तय की जानी चाहिए. एफसीआई जैसी सरकारी एजेंसियों को एमएसपी से नीचे फसल नहीं खरीदारी नहीं करनी चाहिए.'
परिवार में मुखिया के खिलाफ बात होती हैः आजाद
रविवार को राज्यसभा में कृषि बिल पर हंगामे को लेकर सभापति से गुलाम नबी आजाद ने कहा कि दो दिन में जो हुआ उससे कोई खुश नहीं, ये हमारा बड़ा परिवार है. आप मुखिया हैं. घरों में भी परिवार के मुखिया के खिलाफ बात होती है. बिल स्टैंडिंग कमिटी, सेलेक्ट कमेटी को नहीं भेजा जाता. झगड़ा नहीं होना चाहिए था पर कई दिन से भरा हुआ था.
बड़ों का दिल बड़ा होना चाहिएः रामगोपाल यादव
वहीं सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री से चूक हुई है. वो चाहते तो विपक्ष के नेताओं से बात कर सकते थे. गलती हुई है विपक्ष के लोगों से...बड़ों का दिल बड़ा होना चाहिए. सपा नेता ने कहा कि सांसदों का सस्पेंशन रद्द हो, उनकी तरफ से मैं माफी मांगने तो तैयार हूं. सेंस ऑफ हाउस पर ही झगड़ा हो गया. समय सीमा लड़ाई का मुद्दा बना. सेंस ऑफ हाउस नंबर्स से नहीं होता है. क्या सरकार और चेयर के बीच समन्वय नहीं होना चाहिए. उस दिन संशोधन पर वोटिंग नहीं हो पाई, मत विभाजन नहीं हो पाया.
इस दौरान रामगोपाल यादव ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के दिवंगत नेता अरुण जेटली का भी जिक्र किया. रामगोपोल यादव बोले कि अरुण जेटली ने कहा था कि यदि सरकार मतविभाजन नहीं कराती है तो वह अवैध हो जाती है. इस पर सभापति एम वैंकेया नायडू ने कहा कि अरुण जेटली ने यह भी कहा था कि Tyranny of Opposition, tyranny of majority. यानी विपक्ष का अत्याचार, बहुमत का अत्याचार है.