बिहार की चार सीटों के उपचुनाव में सबसे अधिक चर्चा जिस सीट को लेकर रही, वह थी कैमूर जिले की रामगढ़ विधानसभा सीट. रामगढ़ विधानसभा सीट राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और उनके परिवार का गढ़ रही है. आरजेडी का यह मजबूत किला भेदने के लिए सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी पूरी ताकत झोंक रखी थी. दोनों दलों के नेताओं के बीच चुनाव प्रचार का अंतिम चरण आते-आते तीखी बयानबाजियां भी हुईं.
साल 2020 के बिहार चुनाव में रामगढ़ सीट से विधायक निर्वाचित हुए सुधाकर सिंह हालिया आम चुनाव में बक्सर से लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे. विधानसभा की सदस्यता से सुधाकर ने इस्तीफा दे दिया था. सुधाकर के इस्तीफे से रिक्त हुई इस सीट पर आरजेडी ने उनके ही भाई अजीत सिंह को टिकट दिया था. चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में सुधाकर सिंह के एक बयान से सियासी हंगामा खड़ा हो गया था. बक्सर के सांसद ने एक चुनावी जनसभा में चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि तीन सौ बूथों पर हमारे लोग तैयार हैं. पिछली बार की तरह इस बार कोई गुंडई हुई तो छोड़ेंगे नहीं, लाठियों से पिटवाएंगे.
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सुधाकर सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए बिहार सरकार के मंत्री संतोष सिंह नेकहा था कि जो भी लाठी लेकर आएगा, उसकी एक-एक हड्डी चूर-चूर कर देंगे. एक भी हड्डी नहीं बचेगी. सुधाकर सिंह का बयान और प्रचार की कमान संभालना भी आरजेडी के काम न आया. अपने दबदबे वाली रामगढ़ विधानसभा सीट पर आरजेडी हार गई. बिहार में मंच से धमकी देने वाले सांसद सुधाकर सिंह के भाई अजीत न सिर्फ हार गए, तीसरे नंबर पर रहे. आरजेडी के गढ़ में दूसरे नंबर पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उम्मीदवार रहा.
तीसरे नंबर पर रहे सुधाकर के भाई
बक्सर सांसद के भाई अजीत रामगढ़ सीट पर तीसरे नंबर पर रहे. उन्हें 35 हजार 825 वोट मिले. इस सीट पर अशोक सिंह ने कमल खिला दिया. बीजेपी उम्मीदवार को 62 हजार 257 वोट मिले. यूपी की पार्टी मानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी के सतीश यादव दूसरे नंबर पर रहे. सतीश ने अशोक को कड़ी टक्कर दी. उन्हें 60 हजार 895 वोट मिले. कांटे की लड़ाई में बीजेपी के अशोक अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सतीश यादव को 1362 वोट के अंतर से शिकस्त दे दी. इस सीट पर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सुशील कुमार सिंह को मैदान में उतारा था. सुशील को 6513 वोट मिले.