शिवसेना के मुख पत्र सामना में 5 प्रदेशों के विधानसभा चुनाव पर संपादकीय में बीजेपी पर हमला किया गया है. सामना के संपादकीय में लिखा है कि भाजपा ने हर तरह के शस्त्र आजमाकर पश्चिम बंगाल को चुनावी रण का मैदान ही बना दिया है. आसाम में भी सत्ता बरकरार रखने के लिए बीजेपी ने तमाम चुनावी फंडों को आजमाने में जरा भी कोताही नहीं बरती. 90 मतदाताओं वाले एक मतदान केंद्र पर 171 मतदाताओं द्वारा मतदान करने का ‘कीर्तिमान’ इसी प्रयत्न से हुआ है क्या, ऐसी संदेह की धूल इस वजह से उड़ रही है.
सामना में कहा गया है कि देश में फिलहाल कोरोना और तापमान का पारा बढ़ रहा है. उसी दौरान पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ‘ज्वर’ भी बढ़ा हुआ है. इनमें से केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और आसाम इन चार राज्यों में चुनावी माहौल मंगलवार को शांत हो गया.
सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि जिन पांच राज्यों में मंगलवार को मतदान हुए उनमें से हर राज्य में इस बार का विधानसभा चुनाव किसी-न-किसी कारण से ‘कांटे की टक्कर’ सिद्ध हुआ है. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए तो यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन गया है.
पुडुचेरी और तमिलनाडु की चर्चा करते हुए लिखा गया है कि पुडुचेरी में चुनाव के ऐन मौके पर भाजपावालों ने वहां की कांग्रेस सरकार को अल्पमत में ला दिया. वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया इसलिए वहां 78 फीसदी मतदान कुछ अलग परिणाम लानेवाला सिद्ध होगा क्या, यह भी सवाल ही है. तमिलनाडु में सत्ताधारी और विरोधी इन दोनों का पल्स रेट मतदान के कम हुए प्रतिशत ने ऊपर-नीचे किया है. उस राज्य में प्रमुख रूप से अन्नाद्रमुक और द्रमुक के बीच उलट-पलटकर सत्ता परिवर्तन होता रहा है इसलिए कम हुआ मतदान किसे नीचे खींचता है यह मतगणना से ही स्पष्ट होगा.
अखबार लिखता है कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर आसाम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी इन चार राज्यों के विधानसभा चुनाव की धूल शांत हो गई है. इन राज्यों में बढ़े और गिरे हुए मतदान में गिरावट का प्रतिशत टेढ़ी-मेढ़ी बैठी धूल उड़ाने के लिए मतगणना तक जारी रहेगा.