Salman Khurshid Interview: कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद का नैनीताल (Nainital) स्थित घर जला दिया गया. उनके घर पर पथराव भी हुआ. सलमान खुर्शीद ने 'सनराइज ओवर अयोध्या' (Sunrise Over Ayodhya) किताब लिखी है, जिसको लेकर विवाद हो रहा है.
दरअसल, सलमान खुर्शीद ने अपनी किताब में हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठन आईएसआईएस और बोको हरम से कर डाली. उन्होंने हिंदुत्व की राजनीति को खतरनाक बताया. इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने सलमान खुर्शीद से बात की. इंटरव्यू के खास अंश:-
सवाल: क्या आप इस बात से सहमत हैं कि आपकी पुस्तक में जो बाते हैं, वे झूठी हैं, लोगों को भड़काने वाली हैं. कई बातें बढ़ा-चढ़ाकर की गई हैं.
जवाब: बिल्कुल भी नहीं, अगर ऐसा होता तो मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाता. जो भी असहमत हैं, उन्होंने कोई असहमति की बात नहीं की है. उन्होंने जो असहमति दिखाई है, वह इस स्तर तक पहुंच गई है कि मेरा नैनीताल में जो घर है उसका दरवाजा जला दिया गया है. क्या इससे ये सिद्ध नहीं होता कि जो मैं कह रहा था वह सही है? ऐसे में ये समझना होगा कि जिसे वे हिंदुत्व कहते हैं, वह हिंदू धर्म का खंडन करता है. जो हुआ है उससे मेरा बयान पूरी तरह से सही साबित होता है.
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सवाल: किसी भी तरह की हिंसा की निंदा होनी चाहिए, लेकिन जिस आईएसआईएस ने हजारों लोगों को मारा है. क्या हिंदुत्व और उस आतंकी ग्रुप की तुलना सही है?
जवाब: मैंने जो कहा, उसमें एक समानता है. मैंने ये नहीं कहा कि वे पूरी तरह से एक जैसे होते हैं. लेकिन उनमें कुछ खास गुण हैं, मेरे विचार से ये गुण हैं धर्म का दुरुपयोग और धर्म के विपरीत चलना. अगर मैं जिहादी इस्लाम कहूं तो इस्लाम मेरा धर्म है. लेकिन ऐसा कहने से मैं क्यों खुद को बचाऊं? अगर कोई धर्म का दुरुपयोग कर रहा हो तो ऐसा कहने से मैं खुद को क्यों रोकूं? मेरा मत है कि सभी धर्म संगठित रहें, यही कारण है कि जब अयोध्या पर निर्णय आया था, तब मैंने इसका स्वागत किया था.
सवाल: आप पर शब्दों के साथ खेलने का आरोप लगाया जा सकता है. आपको नहीं लगता कि आपने संघ परिवार को यूपी में चुनाव से पहले ये कहने का मौका दे दे दिया है कि आप हिंदुत्व का निरादर कर रहे हैं. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी हिंदुत्व को जीने का तरीका बताया है.
जवाब: तो मैं क्या करुं, क्या मैं हिंदुत्व के सामने खुद को सरेंडर कर दूं. अगर कोई धर्म का दुरुपयोग करेगा? केवल इसलिए कि क्योंकि चुनाव आने वाले हैं, तो मुझे माफ कर दीजिए...हमारी लीडरशिप की इसे लेकर स्पष्ट, वैचारिक स्थिति है. पार्टी का मानना है कि हिंदुत्व और हिंदू धर्म, ये दोनों ही अलग चीजें हैं. यही कारण ही इन दोनों के अलग- अलग नाम हैं. एक है जो मासूम लोगों को मारने में विश्वास रखता है. वहीं दूसरा मिली जुली संस्कृति में विश्वास रख्ता है.
सवाल: आपकी खुद की पार्टी के साथी जिनमें गुलाम नबी आजाद शमिल हैं, उन्होंने भी आपके बयान को बढ़ाकर बोला हुआ कहा है.
जवाब: बहुत बहुत धन्यवाद. तो, गुलाम नबी आजाद मेरे नेता हैं, राहुल गांधी नहीं. क्या ये सही है? गुलाम नबी आजाद बेहद सम्मानजनक व्यक्ति हैं. लेकिन मुझे माफ करिए, मेरी उनसे असहमति है. जब वह ये कहते हैं कि मेरा बयान बढ़ाकर बोला गया है. तब मैं भी सोचता हूं कि ऐसा क्या है, जो बढ़ाकर बोला गया है. लेकिन ऐसा कुछ क्या है? अगर आप ये देखना चाहते हो कि हिंदुत्व क्या कर सकता है तो मेरे नैनीताल में जले घर के दरवाजे को देख लीजिए.
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