कर्नाटक में एक बार फिर टीपू सुल्तान को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. नया विवाद प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की किताब के कवर लेटर को लेकर शुरू हुआ. मंत्री सी एन अश्वथ नारायण को "सिद्दू रियल ड्रीम्स" नामक की जिस पुस्तक का आज विमोचन करना था, उसके कवर पेज पर सिद्दू (सिद्धारमैया) को एक विशेष रूप में दिया गया है.
इसी के बाद वह बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं. ऐसा दावा किया जा रहा है कि सिद्धारमैया को किताब में टीपू सुल्तान के रूप में दिखाया गया है. हालांकि कांग्रेस ने सफाई दी कि सिद्धारमैया को टीपू की पोशाक में दिखाने का टीपू सुल्तान के कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है. अन्ना भाग्य योजना में उन्हें ऐसे दिखाया गया था. अब इस फोटो का इस्तेमाल कवर पेज किया गया है. इसका टीपू सुल्तान से कोई लेना देना नहीं है.
वहीं कर्नाटक कांग्रेस के चीफ डीके शिवकुमार ने सिद्दू की किताब पर कहा- हमारे सभी नेता हिंदू हैं. संसद में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने टीपू के बारे में बात की थी. अगर बीजेपी में दम था तो उन्हें बोलने से रोकना चाहिए था.
उन्होंने ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आ रहे हैं इसलिए बीजेपी वोट के लिए ऐसा कर रही हैं. आप किसी की छवि खराब करने की चाहे कितनी ही कोशिश क्यों न कर लें लेकिन लोग इस पर ध्यान नहीं देंगे.
टीपू सुल्तान के मंदिरों में बदलेगा 'सलाम आरती' का नाम
कर्नाटक सरकार ने पिछले साल दिसंबर में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के मंदिरों में होने वाली सलाम आरती का नाम बदलने का फैसला किया था. इस आरती को सैकड़ों साल पहले टीपू सुल्तान के सम्मान में कोल्लूर में शुरू किया गया था.
कर्नाटक सरकार में मंत्री शशिकला जोले ने कहा था कि सरकार ने दीवतिगे सलाम का नाम बदलकर दीवतिगे नमस्कार, सलाम आरती का नाम बदलकर आरती नमस्कार करने का फैसला लिया है. इसी तरह सलाम मंगल आरती का नाम बदलकर मंगल आरती नमस्कार किया जाएगा लेकिन रीति-रिवाज पहले की तरह परंपरा के अनुरूप ही जारी रहेंगे.
उन्होंने बताया कि कर्नाटक की राज्य धार्मिक परिषद की बैठक में कुछ श्रद्धालुओं ने इन आरतियों के नाम बदलने मांग की थी.