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मोदी सरकार के कृषि कानून की 'काट' तलाशने में जुटी कांग्रेस, चला ये दांव

कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारों से कहा गया है कि वे अपने यहां अनुच्छेद 254(2) के तहत बिल पास करने पर विचार करें, जो मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि विधेयकों को निष्क्रिय करता हो. ये किसानों को मोदी सरकार द्वारा किए गए घोर अन्याय से भी निजात दिलाएगा.

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी (फाइल फोटो)
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • संविधान के अनुच्छेद 254 (2) से तोड़ ढूंढने की तैयारी
  • कांग्रेस शासित राज्यों को संभावना तलाशने की सलाह
  • केंद्र के तीनों विवादास्पद बिल अब कानून बन गए हैं

मोदी सरकार के कृषि कानून के खिलाफ कांग्रेस मोर्चा खोल चुकी है. अब पार्टी आलाकमान ने कांग्रेस शासित राज्यों को संविधान के अनुच्छेद 254 (2) के तहत कानून पारित करने की संभावनाओं को तलाशने की सलाह दी है. संविधान का यह अनुच्छेद राज्य विधानसभाओं को राज्य के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कृषि विरोधी केंद्रीय कानूनों को नकारने के लिए एक कानून पारित करने की अनुमति देता है. 

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सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारों से कहा गया है कि वे अपने यहां अनुच्छेद 254(2) के तहत बिल पास करने पर विचार करें, जो मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि विधेयकों को निष्क्रिय करता हो. ये किसानों को मोदी सरकार द्वारा किए गए घोर अन्याय से भी निजात दिलाएगा. 

बता दें कि किसानों और राजनीतिक दलों के लगातार विरोध के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को संसद से पास कृषि बिल को मंजूरी दे दी थी. किसान और राजनीतिक दल इस विधेयकों को वापस लेने की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी अपील किसी काम न आई, तीनों विवादास्पद बिल अब कानून बन गए हैं. 

कृषि बिल के खिलाफ SC में याचिका

केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को चुनौती दी है. संसद द्वारा पिछले सप्ताह पारित किए गए किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अधिनियम, 2020 के किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौते के खिलाफ याचिका दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे. 

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