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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इंटरनेशनल बॉक्सर विजेंदर सिंह बुधवार को कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की उपस्थिति में विजेंदर ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. बीजेपी में शामिल होने से ठीक एक दिन पहले तक मुक्केबाजी में भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता विजेंदर सिंह पूरी तरह से कांग्रेसी थे और राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसने वाले ट्वीट को री-पोस्ट कर रहे थे.
कभी विजेंदर सिंह ने पहलवानों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए सवाल उठाए थे कि साक्षी मलिक के कुश्ती से संन्यास लेने से पूरी दुनिया में भारत की छवि बढ़ेगी या घटेगी? पूरा खेल उद्योग निराश है. इसके बाद क्या माता-पिता अपनी बेटियों को स्टेडियम भेजेंगे? अब वही विजेंदर कह रहे हैं कि जब से बीजेपी सत्ता में आई है, खिलाड़ियों को काफी सम्मान मिलता है.
दरअसल, बीजेपी ज्वाइन करने के दौरान विजेंदर ने कहा कि मैं आज बीजेपी में शामिल हो रहा हूं. यह मेरे लिए घर वापसी जैसा है. 2019 में मैंने चुनाव लड़ा. वापस आना अच्छा है. जब हम विदेश में प्रतिस्पर्धा करने जाते थे, तो हवाई अड्डों पर बहुत सारी घटनाएं होती थीं. लेकिन जब से बीजेपी सत्ता में आई है, खिलाड़ियों को काफी सम्मान मिलता है. मुझे आशा है कि मैं लोगों को सही मार्ग दिखा सकूंगा. उन्होंने कहा कि मैं वही विजेंदर हूं. मैं गलत को गलत, सही को सही कहूंगा.
आजतक ने बॉक्सर विजेंदर सिंह से खास बातचीत की. मथुरा से कांग्रेस का लोकसभा टिकट लगभग तय होने के बाद भी बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर विजेंदर ने कहा कि घर वापसी हो गई है. 2019 में कांग्रेस में शामिल हुआ था, लेकिन अब लगा कि जो लोगों की पसंद है, उसके साथ जाना चाहिए, इसलिए मैं भारतीय जनता पार्टी में आया. ह्रदय परिवर्तन कभी भी हो सकता है. पहलवानों के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि मैं खिलाड़ियों के साथ था और आगे भी रहूंगा. जो मुझे लगेगा गलत है, मैं उसके खिलाफ आवाज उठाऊंगा. जहां पार्टी भेजेगी मैं जाऊंगा.
कांग्रेस का आतंक प्रेम जगजाहिर है: तावड़े
विजेंदर सिंह के बीजेपी में शामिल होने पर पार्टी महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि मेरे पास राहुल गांधी के लिए तीन सवाल हैं. वह एसडीपीआई का समर्थन ले रहे हैं, जो प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का राजनीतिक मोर्चा है. उन पर प्रतिबंध लगाया गया है, क्योंकि उनके आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के सबूत हैं. कांग्रेस का आतंक प्रेम जगजाहिर है. क्या ऐसी एसडीपीआई राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान में फिट बैठ सकती है?
'कांग्रेस के पास खड़गे की तस्वीर नहीं?'
तावड़े ने कहा कि दूसरी बात ये है कि दिल्ली में घमंडिया गठबंधन की रैली थी. लेकिन उसी रैली में सीपीआई मौजूद थी जो पश्चिम बंगाल में कांग्रेस से मुकाबला करने के लिए राहुल गांधी, टीएमसी के खिलाफ लड़ रही है. ये कैसा गठबंधन है? कांग्रेस के विज्ञापन आये हैं. लेकिन उनके पास मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीरें नहीं हैं. क्या वहां पार्टी अध्यक्ष की तस्वीर नहीं होनी चाहिए? राहुल गांधी, सोनिया गांधी क्यों नहीं? क्या आप चिंतित हैं कि इन फोटो को जोड़ने से आपके वोट में बाधा आ सकती है?
उन्होंने आगे कहा कि विजेंदर आज हमारे साथ जुड़ गए हैं. वह एक अच्छे खिलाड़ी हैं. वह विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं. हम उसका इस्तेमाल हरियाणा, दिल्ली और यूपी में करेंगे.
कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं विजेंदर
बता दें कि विजेंदर सिंह ने साल 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीति में कदम रखा था. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर दक्षिण दिल्ली से लड़ा था. हालांकि, वो बीजेपी के रमेश बिधूड़ी से चुनाव हार गए थे. बिधूड़ी को 6 लाख 87 हजार से ज्यादा वोट मिले थे. आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा को 3 लाख 19 हजार से ज्यादा और विजेंदर को 1 लाख 64 हजार से ज्यादा वोट मिले थे.