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'धर्म के ठेकेदारों और ढोंगियों की कलई खोल दी', RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर बोले स्वामी प्रसाद मौर्य

एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने बोलते हुए कहा था कि भागवत ने कहा कि हमारे समाज के बंटवारे का ही फायदा दूसरों ने उठाया. इसके अलावा उन्होंने जाति को लेकर भी बयान दिया. भागवत के इस बयान पर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने इसको लेकर ट्वीट किया है.

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सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और RSS चीफ मोहन भागवत
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और RSS चीफ मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को जातिवाद को लेकर बड़ा बयान दिया. जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान ने हमेशा बोला है कि मेरे लिए सभी एक हैं. उनमें कोई जाति, वर्ण नहीं है. लेकिन पंडितों ने श्रेणी बनाई, वो गलत था. उनके इस बयान के बाद अब राजनीति बयानबाजी भी शुरू हो गई है. इस कड़ी में रामचरित मानस पर विवादित बयान देखकर घिरे सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी है. 

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स्वामी प्रसाद मौर्य ने ट्वीट करते हुए लिखा, "जाति-व्यवस्था पंडितों (ब्राह्मणों) ने बनाई है, यह कहकर RSS प्रमुख भागवत ने धर्म की आड़ में महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को गाली देने वाले तथाकथित धर्म के ठेकेदारों व ढोंगियों की कलई खोल दी, कम से कम अब तो रामचरित्र मानस से आपत्तिजनक टिप्पड़ी हटाने के लिये आगे आयें."

उन्होंने आगे लिखा, "यदि यह बयान मजबूरी का नहीं है तो साहस दिखाते हुए केंद्र सरकार को कहकर, रामचरितमानस से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर नीच, अधम कहने तथा महिलाओं, आदिवासियों, दलितों व पिछड़ों को प्रताड़ित, अपमानित करने वाली टिप्पणियों को हटवायें. मात्र बयान देकर लीपापोती करने से बात बनने वाली नहीं है."

बता दें कि एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने बोलते हुए कहा था कि भागवत ने कहा कि हमारे समाज के बंटवारे का ही फायदा दूसरों ने उठाया. इसी का फायदा उठाकर हमारे देश में आक्रमण हुए और बाहर से आये लोगों ने फायदा उठाया. हिन्दू समाज देश में नष्ट होने का भय दिख रहा है क्या? यह बात आपको कोई ब्राह्मण नहीं बता सकता, आपको समझना होगा. हमारे आजीविका का मतलब समाज के प्रति भी जिम्मेदारी होती है. जब हर काम समाज के लिए है तो कोई ऊंचा, कोई नीचा, या कोई अलग कैसे हो गया? 

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उन्होंने कहा- भगवान ने हमेशा बोला है कि मेरे लिए सभी एक हैं. उनमें कोई जाति, वर्ण नहीं है. लेकिन पंडितों ने श्रेणी बनाई, वो गलत था. देश में विवेक, चेतना सभी एक है. उसमें कोई अंतर नहीं. बस मत अलग-अलग हैं. धर्म को हमने बदलने की कोशिश नहीं की. बदलता तो धर्म छोड़ दो. ऐसा बाबा साहेब अम्बेडकर ने कहा. परिस्थिति को कैसे बदलों, यह बताया है. संत रोहिदास, तुलसीदास, कबीर, सूरदास से ऊंचे थे, इसलिए संत शिरोमणि थे. संत रोहिदास शास्त्रार्थ में ब्राह्मणों से भले नहीं जीत सके, लेकिन उन्होंने लोगों के मन को छुआ और विश्वास दिया कि भगवान हैं.

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