पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को एनडीए का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है. जबकि विपक्ष की तरफ से पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा का नाम सामने किया गया है. विपक्ष ने रविवार को दिल्ली में मंथन के बाद नाम की घोषणा की. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस इस बैठक में शामिल नहीं हुई. सिर्फ इतना ही नहीं, जगदीप धनखड़ को समर्थन के सवाल पर भी टीएमसी खेमे ने खामोशी अख्तियार कर रखी है.
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन ने कहा कि वो शहीद दिवस के कार्यक्रम की शानदार सफलता में जुटे हुए हैं. उन्होंने आजतक से बात करते हुए कहा कि टीएमसी शहीद दिवस की तैयारी में जुटी है. उस दिन के बाद हमारी पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इसी मुद्दे पर संसदीय समिति की बैठक बुलाई है, वह उस बैठक में पार्टी का रुख तय करेंगी.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का लंबे समय से राज्यपाल जगदीप धनखड़ के साथ लगातार टकराव का रिश्ता रहा है और उनकी पार्टी उन्हें संवैधानिक पद से हटाने की मांग कर रही थी, लेकिन बीजेपी ने धनखड़ को अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुना, यह उनके और ममता के नेतृत्व वाली सरकार के बीच संबंधों को कैसे प्रभावित करेगा?
टीएमसी सांसद सेन ने कहा कि राज्यपाल के तौर पर वह असंसदीय तरीके से ममता बनर्जी सरकार की छवि खराब करते थे. उन्होंने एक संवैधानिक पद पर रहते हुए एक राजनीतिक व्यक्ति के रूप में कार्य किया. हमने इसका विरोध किया था. अब उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है. इस मुद्दे पर सिर्फ ममता दीदी ही बोल सकती हैं.
शनिवार शाम को टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भी कहा था कि टीएमसी अभी इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है. हमारी पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी पार्टी के सभी सांसदों की बैठक बुलाएंगी. वह उस मुलाकात के बाद प्रतिक्रिया देंगी.
बता दें कि 16 जुलाई की शाम को बीजेपी ने पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में बीजेपी के संसदीय दल की बैठक बुलाई गई थी, जिसके बाद जगदीप धनखड़ को एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था.
(इनपुट- ऋतिक मंडल)