नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को प्रदर्शन जारी है. सरकार इन कानूनों पर 18 महीने तक रोक लगाने पर सहमत हो गई है, लेकिन किसान नए कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं. किसानों ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड पर दिल्ली के रिंग रोड में विशाल ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान किया है. रविवार को कृषि कानूनों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने आज तक खास बातचीत की.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ये कानून पहले ही बन जाना चाहिए था. हर अच्छे काम में बाधा आती है. फिलहाल कृषि कानून पर रोक है. हमें सभी के हित में काम करना है. 26 जनवरी के मौके पर परेड को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि साल में 365 दिन पड़े हैं, किसी भी दिन ताकत दिखा लेते. लेकिन 26 जनवरी इसके लिए उपयुक्त दिन नहीं है.
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे इस रैली के लिए कोई और दिन निश्चित करें. वहीं उन्होंने कहा कि मुझे ये भी विश्वास है कि किसान यदि किसान 26 जनवरी को किसी प्रकार का आंदोलन करते भी हैं, तो ये आंदोलन पूरी तरह अनुशासित होगा.
नरेंद्र तोमर ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और किसानों का हित चाहती है. कोई अदृश्य ताकत है जो चाहती है कि ये मसला हल नहीं हो. जब कृषि मंत्री से उन ताकतों का नाम पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा. उन्होंने कहा कि बातचीत के अगले ही दिन किसानों का सुर बदल जाता है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के नोटिस भेजे जाने के मामले में कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि किसी भी चीज को किसान आंदोलन से जोड़ना सही नहीं है. हमारा काम है कि किसानों की समस्या को किसी भी प्रकार से हल करना. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है.