जमीयत के वरिष्ठ नेता अरशद मदनी के बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है. अब बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी ऐतराज जताया है. उन्होंने इस तरह के बयान देने वालों को पाकिस्तान चले जाने की सलाह दी है. गिरिराज का कहना था कि ये लोग जिन्ना की सोच वाले हैं.
गिरिराज ने कहा- मदनी हो या जो हो. भारत में मोदी की सरकार को बदनाम करने के लिए ये सब कर रहे हैं. 1400 साल इस्लाम की आयु है. इससे पुराना तो ईसाई धर्म है. ईसाई 2200 साल पुराना है. हमारे ओम और शिव अनादि हैं. हमारे कई ऋषि हैं, जिन्होंने हजारों साल तपस्या की है. मुगलों ने हमारे ही पूर्वजों को मुसलमान बनाया. हमारे पूर्वजों ने गलती की. जब आजादी के बाद देश का बंटवारा हुआ तो इनको पाकिस्तान भेजना देना चाहिए था. ये लोग जिन्ना की सोच वाले हैं.
'आदम ही हिंदू और मुसलमान के पूर्वज'
बता दें कि दिल्ली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दो दिन के अधिवेशन में रविवार को दारुल उलूम देवबंद के प्रमुख और जमीयत के धर्मगुरु मौलाना अरशद मदनी के बयान से विवाद खड़ा हो गया है. अरशद मदनी ने कहा कि ओम और अल्लाह एक ही हैं और सवाल का जिक्र भी कर दिया कि जब धरती पर कोई नहीं था, तब मनु किसे पूजते थे? इतना ही नहीं, उन्होंने आदम को ही हिंदू और मुसलमान का पूर्वज बताया. वहां मौजूद दूसरे कई धर्मगुरुओं ने विरोध किया और मंच का बहिष्कार कर दिया.
'ओम और अल्लाह एक ही हैं'
विवाद के बाद मौलाना अरशद मदनी ने फिर बयान दिया और कहा- वहां हिन्दू, सिख बाकी धर्म के लोग भी बैठे थे, कोई और नहीं उठा. हमारा मानना है कि उन्हें (जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि) बैठे रहना चाहिए था. ओम और अल्लाह एक ही हैं. जो लोग घर वापसी के बात करते हैं, उनको पता होना चाहिए कि हम तो अपने घर में ही बैठे हैं. जो सबसे पहला इंसान था वो किसकी इबादत करता था?
मौलाना के बयान पर जैन मुनि का ऐतराज
मौलाना अरशद मदनी के बयान को लेकर जैन मुनी लोकेश मुनि खफा हो गए. उन्होंने मंच से ही आपत्ति जताई और कहा- 'आपने जो बात कही है, मैं उससे सहमत नहीं हूं. मेरे साथ सर्वधर्म के संत भी सहमत नहीं हैं. हम सिर्फ सहमत हैं कि मिलजुलकर रहें, प्यार से रहें, मोहब्बत से रहें.' इसके बाद वे कुछ अन्य धर्मगुरुओं के साथ कार्यक्रम से चले गए, लेकिन उससे पहले यह भी कहा कि "जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर हुए, उससे पहले 23वें भगवान पार्श्वनाथ थे. नेमिनाथ योगीराज कृष्ण के चचेरे भाई थे, किंतु याद रखिए इससे पहले भगवान ऋषभदेव पहले तीर्थंकर थे, जिनके पुत्र भरत के नाम पर इस भारत देश का नाम पड़ा है. आप ऐसे नहीं मिटा सकते. ये जो कहानी अल्लाह.. मनु और उसकी औलाद... ये सब बेकार की बातें हैं.'