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'कायर नहीं है देवगौड़ा का परिवार, जिम्मेदारी मेरी...', बेटे की हार पर बोले केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी

बेटे निखिल कुमारस्वामी की हार पर पहली बार केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी का बयान आया है. उन्होंने कहा,'मैं निखिल की हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं. देवेगौड़ा का परिवार कायर नहीं है. निखिल एक योद्धा है.'

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अपने बेटे निखिल के साथ केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी. (File Photo)
अपने बेटे निखिल के साथ केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी. (File Photo)

कर्नाटक की चन्नपटना सीट पर हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे निखिल को हार का मुंह देखना पड़ा. निखिल NDA (BJP-JDS) के संयुक्त प्रत्याशी थे. इस हार के बाद अब केंद्रीय मंत्री का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा,'मैं निखिल की हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं. देवेगौड़ा का परिवार कायर नहीं है. निखिल एक योद्धा है.'

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कसम खाता हूं, जवाब दूंगा: कुमारस्वामी

कुमारस्वामी ने जेडीएस और बीजेपी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करने के लिए चन्नपटना का दौरा किया. दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,'मैं कसम खाता हूं, मैं उन लोगों को जवाब दूंगा, जो दावा करते हैं कि रामनगर से JDS का सफाया हो गया है. अगले चुनाव में, JDS जिले के सभी 4 विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल करेगी. हमें यहां से हटाना असंभव है. मेरी और निखिल की राजनीतिक यात्रा इसी क्षेत्र से शुरू हुई थी. आने वाले चुनावों में JDS चन्नपटना में 25 हजार वोटों की बढ़त हासिल करेगी.'

'AHINDA सम्मेलनों का क्या हुआ'

राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर कटाक्ष करते हुए कुमारस्वामी ने कहा,'वह AHINDA सम्मेलनों के आयोजन का दावा करते हैं, लेकिन पिछले 17 महीनों में उन्होंने इन समुदायों के लिए क्या किया है? क्या उन्होंने इन समुदायों की गरिमा की रक्षा की है या उनका कल्याण सुनिश्चित किया है?' बता दें कि AHINDA शब्द तीन शब्दों से मिलकर बना है. अल्पसंख्यक (Alpasankyatha), हिंदूलिदा या पिछड़ा (Hindulida) और दलित या अनुसूचित जाति (Dalit).

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कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया,'वाल्मीकि निगम के फंड को किसने लूटा? क्या वे बोवी समुदाय के लिए बने फंड को नहीं लूट रहे हैं? क्या हमने मांड्या में आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार नहीं देखा, जहां 20 से 40 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी गई? क्या इसे ही वे सम्मान की रक्षा कहते हैं? क्या यही वह आत्म-सम्मान है, जिसका सिद्धारमैया अपने भाषणों में वादा करते हैं?'

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