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उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट और रामपुर व खतौली विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं. मैनपुरी और खतौली सीट पर सपा और RLD की जीत हुई है. वहीं रामपुर सीट भारतीय जनता पार्टी की झोली में आई है. इस उपचुनाव से केंद्र या राज्य की सत्ता पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा, लेकिन इसे बीजेपी और सपा दोनों ने साख की लड़ाई बना लिया था. बीजेपी ने इन तीनों ही सीटों को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी.
मैनपुरी लोकसभा सीट
मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा प्रत्याशी डिंपल यादव जीत गई हैं. उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी रघुराज शाक्य को हरा दिया है. डिंपल अकेले जसवंतनगर विधानसभा सीट से ही 38 हजार से अधिक वोटों से आगे निकल गई थीं. वहीं रघुराज शाक्य अपने बूथ धौलपुर खेड़ा से भी हार गए.
पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी लोकसभा सीट खाली हुई थी. यहां से सपा ने डिंपल यादव को मैदान में उतारा था. उनको चाचा शिवपाल यादव का भी सपोर्ट मिला था. डिंपल यादव को 6,18,120 वोट मिले. वहीं रघुराज शाक्य को 3,29,659 वोट मिले. इस तरह डिंपल ने रघुराज को 2,88,461 वोटों से मात दी.
खतौली सीट पर आरएलडी जीती
मुजफ्फरनगर जिले की खतौली सीट पर आरएलडी प्रत्याशी मदन भैया ने जीत दर्ज की. उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी राजकुमारी सैनी को हराया. यहां बीजेपी विधायक विक्रम सैनी की विधायकी छिन गई थी. इसलिए यहां उपचुनाव हुआ था. बीजेपी ने यहां से विक्रम सिंह सैनी की पत्नी रामकुमारी सैनी को उतारा था. वहीं RLD-सपा ने यहां मदन भैया को उम्मीदवार बनाया था.
विधानसभा चुनाव में मदन भैया को 97,139 वोट मिले. वहीं रामकुमारी को 74,996 वोट मिले. मदन भैया का जीतना चौंकाने वाला है. क्योंकि चार बार विधायक रहे मदन आखिरी बार इलेक्शन 15 साल पहले जीते थे. 2012, 2017 और 2022 में उन्हें लोनी से हार का सामना करना पड़ा था. माना जा रहा है कि आखिरी मौके पर भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद ने आरएलडी-सपा उम्मीदवार को समर्थन दे दिया था. इस वजह से दलित वोट बैंक मदन भैया की तरफ शिफ्ट हो गया और उनको जीतने में मदद मिली.
रामपुर सीट पर सपा को लगा झटका
रामपुर विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी आसिम राजा हार गए हैं. इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार आकाश सक्सेना की जीत हुई है. आकाश को 81,432 वोट मिले. वहीं असिम रजा को 47,296 लोगों ने वोट किया. इस सीट पर कुल 10 उम्मीदवार मैदान में थे. बता दें कि रामपुर के विधायक आजम खान को 2019 के एक हेट स्पीच के मामले में दोषी पाया गया था. इसके बाद उनको अयोग्य ठहराया दिया गया और उनकी विधायकी छिन गई. इसलिए वहां उपचुनाव हुए. कांग्रेस के नेता नवाब काजिम अली ने यहां बीजेपी उम्मीदवार का समर्थन किया था. इसका भी उनको फायदा मिला.
यूपी का उपचुनाव भले ही तीन सीटों के लिए हो, लेकिन इसके संदेश सूबे के सियासी भविष्य का फैसला करेंगे. इसे बीजेपी और सपा के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था. इस टेस्ट में सपा के दो उम्मीदवार जीते हैं, वहीं बीजेपी का एक. यूपी के नगर निकाय और लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले होने वाले मैनपुरी, रामपुर खतौली उपचुनाव पर सबकी निगाहें थीं.