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नाराजगी-नारेबाजी के बीच पुष्कर सिंह धामी बने उत्तराखंड के नए CM, दबाव में सीनियर नेताओं की वापसी

उत्तराखंड के 45 साल के पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने आज मुख्यमंत्री पद (Chief Minister) की शपथ ले ली. वे राज्य के 11 मुख्यमंत्री बन गए हैं. सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत समेत कइयों ने मंत्री पद की शपथ ली है.

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पुष्कर सिंह धामी
पुष्कर सिंह धामी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पुष्कर सिंह धामी ने ली सीएम पद की शपथ
  • सतपाल महाराज समेत कइयों ने ली मंत्री पद की शपथ
  • राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने दिलाई शपथ

उत्तराखंड के 45 साल के पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. वे राज्य के 11वें मुख्यमंत्री बन गए हैं. राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने राजभवन में पुष्कर सिंह धामी के अलावा, कई अन्य वरिष्ठ विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत को मंत्री बनाया गया है. बंशीधर, यशपाल आर्य, बिशन सिंह को भी राज्यपाल ने मंत्री पद की शपथ दिलाई है. वहीं, सुबोध उनियाल ने भी मंत्री पद की शपथ ली.

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सुबह से ही कहा जा रहा था कि धामी को नया मुख्यमंत्री घोषित किए जाने की वजह से कई नेता नाराज चल रहे हैं. इस वजह से बंद कमरे में लगातार बैठकें की जा रही थीं. कई जगह नारेबाजी की भी घटनाएं सामने आईं. वहीं, बीजेपी ने नाराजगी वाले दावों को खारिज कर दिया था. 

राज्यपाल ने अरविंद पांडेय, गणेश जोशी को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई. इसके अलावा, रेखा आर्य, डॉ. धन सिंह रावत, यतीश्वरानंद ने भी मंत्री पद की शपथ ली है. धामी के नाम का ऐलान शनिवार को देहरादून में हुई बीजेपी के विधायक दलों की बैठक में किया गया था.

राजभवन में चले शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, बिशन सिंह, मदन कौशिक, गणेश जोशी, अरविंद पांडे, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य, बंशीधर शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए राजभवन पहुंचे थे. पुष्कर सिंह धामी से पहले तीरथ सिंह रावत को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन संवैधानिक संकट के चलते उन्होंने चार महीने के भीतर ही इस्तीफा दे दिया. उन्हें छह महीनों के भीतर विधानसभा पहुंचना जरूरी था.

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उत्तराखंड के नए सीएम बने धामी
उत्तराखंड के नए सीएम बने धामी

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पुष्कर सिंह धामी को कई नेताओं ने बधाई दी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा, ''पुष्कर सिंह जी को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक शुभकामनाएं. मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आप पूरी निष्ठा व समर्पण भाव से देवभूमि उत्तराखंड की विकास यात्रा और जनकल्याण के कार्यों को नई ऊर्जा व गति प्रदान करेंगे.''

कई घंटों तक प्रदेश अध्यक्ष के घर चलीं बैठकें

पुष्कर सिंह धामी के शपथ-ग्रहण से पहले देहरादून में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक (Madan Kaushik) के घर पर बैठकों का दौर काफी देर तक चलता रहा. जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 11 बजे से लगातार मीटिंग चल रही थी. विधायकों का आना-जाना लगा रहा. वहीं, दूसरी तरफ पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज से भी मुलाकात की थी. बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा नाराज नेताओं में सतपाल महाराज का ही नाम था, लिहाजा शपथ ग्रहण से पहले पुष्कर सिंह धामी ने उनसे जाकर मुलाकात की.

पुष्कर सिंह धामी
पुष्कर सिंह धामी

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इससे पहले सुबह ऐसी खबरें भी आई थीं कि 35 विधायक दिल्ली पहुंच गए हैं. हालांकि, बीजेपी विधायकों ने इसे अफवाह बताया है. बीजेपी विधायक बनसिधर भगत का कहना है कि "मैंने 35 विधायकों के दिल्ली पहुंचने के बारे में कहीं पढ़ा है. प्लीज मुझे बताएं कि वो कौन विधायक हैं? ये सब अफवाह हैं. हमारे नेता पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हुए हैं."

धामी ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से की मुलाकात

रविवार सुबह से एक ओर बीजेपी विधायकों की मीटिंग चल रही थी तो दूसरी ओर पुष्कर सिंह धामी पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिलने उनके घर पहुंचे. धामी ने सुबह-सुबह पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) और त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) से मुलाकात की. साथ ही उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चंद खडूरी से भी उनके घर जाकर मुलाकात की. इन तीनों के अलावा धामी ने राज्य के मंत्री सतपाल महाराज (Satpal Maharaj) से भी उनके घर पर मुलाकात की. 

कांग्रेस बोली- बीजेपी की गुटबंदी सामने आई

सीएम बदलने पर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तराखंड के अंदर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने का काम किया है और लोगों के घाव पर मरहम की जगह नमक छिड़क दिया है. 

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उन्होंने आगे कहा कि हम स्वीकार करते हैं कि 5 साल पहले 2016 में इसी तरीके से घटनाक्रम हमारी पार्टी में हुआ था जब हमारे बहुत सारे साथी हमें छोड़कर अलग हुए थे. बीजेपी ने जिस तरह से उन साथियों के नेतृत्व को आहत किया है उससे आज वह तमाम साथी आहत हैं. इसीलिए नए मुख्यमंत्री के बनने पर भाजपा में गुटबंदी सामने आ रही है.

 

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