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बंगाल: कलकत्ता HC का बड़ा फैसला, चुनाव बाद हत्या और रेप के मामलों की जांच CBI को सौंपी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद रेप और हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच राज्य सरकार को सीबीआई को सौंपने को कहा है. इस मामले में गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कलकत्ता हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच ने चुनाव बाद हिंसा में रेप और हत्या के मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने को कहा है.

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पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी.
पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चुनाव बाद हिंसा की जांच CBI करे- HC
  • कुछ मामलों की SIT भी करेगी जांच
  • पीड़ितों को मुआवजा भी मिलेगा

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद रेप और हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच राज्य सरकार को सीबीआई को सौंपने को कहा है.  इस मामले में गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कलकत्ता हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच ने चुनाव बाद हिंसा में रेप और हत्या के मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने को कहा है. इसके अलावा चुनावी हिंसा के दूसरे मामलों की जांच के हाई कोर्ट की निगरानी में गठित एक स्पेशल जांच टीम करेगी. अदालत ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सीबीआई को मदद करने को कहा है. 

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गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं. ये आदेश इस प्रकार हैं. 

1- चुनाव बाद हत्या और बलात्कार के सभी केस की जांच सीबीआई को दी जाए. 

2-चुनावी हिंसा से जुड़े दूसरे केस की जांच अदालत की निगरानी में गठित एक स्पेशल जांच टीम करेगी. अदालत ने इस कमेटी का गठन कर दिया है. ये कमेटी पुलिस अधिकारी सुमन बाला साहू (डीजी रैंक अधिकारी) और दो अन्य अधिकारियों के नेतृत्व में काम करेगी. ये कमेटी 6 हफ्तों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपेगी. इसके बाद इस मामले पर अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को होगी. 

3.कोर्ट के निर्देश के बिना किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. 

4. पीड़ितों को सीधे उनके बैंक खाते में मुआवजा दिया जाएगा. 

5.जांच पारदर्शी तरीके से होगा और राज्य सरकार की सभी एजेंसियां जांच एजेंसियों की मदद करेगी. 

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6. वैसा कोई भी केस जो चुनाव बाद हिंसा से नहीं जुड़ा है उसे जांच के लिए संबंधित अधिकारी को सौंपा जाएगा. 

7. इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार के मंत्री ज्योतिप्रियो मल्लिक और विधायक पार्था भौमिक की एक याचिका खारिज कर दी. इस अपील में इन दोनों की एक अपील को भी खारिज कर दिया है. 

 

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