बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय अपने बेटे शुभ्रांशु रॉय के साथ आखिरकार चार साल के बाद टीएमसी में वापसी कर गए. मुख्यमंत्री बनर्जी ने शुक्रवार को मुकुल रॉय को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए कहा कि मुकुल घर का लड़का है, घर ही वापस आया है. अभिनंदन है. इसी के साथ मुकुल रॉय और ममता बनर्जी की दूरियां खत्म हो गईं, लेकिन चार साल के बाद घर वापसी करने वाले मुकुल रॉय की भूमिका पार्टी में क्या होगी?
मुकुल रॉय ने जिन उम्मीदों के साथ 2017 में टीएमसी छोड़ी थी, वो बीजेपी में रहने के दौरान पूरी नहीं हो सकी. बीजेपी ने उन्हें विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तो बनाया, लेकिन चुनाव के दौरान कोई खास भूमिका नहीं रही. चुनाव के बाद प्रतिपक्ष के नेता के चयन का मामला आया तो मुकुल रॉय जगह हाल ही में पार्टी में शामिल शुभेंदु अधिकारी को इस पद पर बिठा दिया गया. इसके बाद उनके पास बीजेपी में बने रहने की कोई वजह नहीं बची थी. यही वजह रही कि मुकुल रॉय ने घर वापसी करना बेहतर समझा.
टीएमसी में शामिल होने के बाद मुकुल रॉय ने कहा कि मुझे पार्टी में वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है. बीजेपी से बाहर निकलकर अपने लोगों और पुराने लोगों से मिलकर बहुत संतुष्टि मिल रही है. मैं बीजेपी में काम नहीं कर पाया, जिसके चलते अपने पुराने घर वापस आ गया. उन्होंने कहा कि बीजेपी की बंगाल जो हालत है, ऐसे में कोई भी नेता वहां नहीं रहेगा. मैं वहां नहीं रह सका. इसलिए घर लौट आया. उन्होंने ममता की जमकर तारीफ की.
वहीं, ममता बनर्जी ने कहा कि मुकुल रॉय इसी परिवार के सदस्य हैं. हमारे बीच कोई मतभेद नहीं था. मुकुल रॉय ने चुनाव अभियान के दौरान कभी टीएमसी के खिलाफ कोई बात नहीं की थी. टीएमसी एक परिवार है और वो हमारे इस परिवार के सदस्य हैं. ममता बनर्जी ने कहा कि वह (मुकुल रॉय) पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. पहले वे जो भूमिका निभाते थे, भविष्य में भी वे वही भूमिका निभाएंगे.
पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पत्रकार जयंत घोषाल ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि मौजूदा समय में मुकुल रॉय की भूमिका टीएमसी में काफी अहम होने जा रही है. ममता बनर्जी तीसरी बार सत्ता में आने के साथ ही अपनी पार्टी का विस्तार पश्चिम बंगाल से बाहर दूसरे राज्यों में भी करना चाहती है. खासकर ओडिशा और नार्थ ईस्ट के राज्यों में, जहां पहले भी टीएमसी एक दो सीटें जीतती रही है. ऐसे में मुकुल रॉय को इन राज्यों में टीएमसी जनाधार बढ़ाने और पार्टी के विस्तार करने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
जयंत घोषाल कहते हैं कि ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान ही जिस तरह से मोदी सरकार और खिलाफ विपक्ष को एकजुट होने का ऐलान किया है, वो अभी भी उनके एजेंडे में है. ऐसे में देश की तमाम विपक्षी पार्टियों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने और उन्हें जुट करने की मुहिम में मुकुल रॉय को ममता बनर्जी लगा सकती हैं. मुकुल रॉय टीएमसी में रहते हुए केंद्रीय राजनीति ही किया करते थे और उनके तमाम विपक्षी पार्टियों के साथ बेहतर संबंध रहे हैं. विपक्षी दलों को एकजुट करने में वो अहम किरदार अदा कर सकते हैं.
दरअसल, टीएमसी छोड़ने से पहले मुकुल रॉय की पार्टी में नंबर दो की हुआ करती थी. चुनावी प्रबंधन का काम मुकुल रॉय संभाला करते थे. बंगाल के कोने-कोने में टीएमसी संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है. इसी वजह से मुकुल को 'बंगाल की राजनीति का चाणक्य' भी कहा जाता रहा. टीएमसी में मुकुल की जगह अब भी खाली है. मुकुल रॉय के लिए टीएमसी में बीजेपी से ज्यादा संभावनाएं दिख रही हैं.
हालांकि, ममता बनर्जी ने मुकुल के बीजेपी में शामिल होने के बाद उस खाली जगह को भरने के लिए शुभेंदु अधिकारी को आगे जरूर बढ़ाया था. लेकिन वो उसकी भरपाई करने में नाकाम रहे. शुभेंदु अधिकारी के बाद अब एक बार फिर मुकुल रॉय ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में शामिल होंगे. वहीं, ममता के उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी को भी इनसे कोई शिकायत नहीं है.
मुकुल रॉय की टीएमसी में वापसी से ना सिर्फ उनका रुतबा बढ़ेगा, बल्कि सत्ता, सम्मान और बेटे का भविष्य भी बनता दिख रहा है. ऐसे में राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी की वापसी को एक झटके में लिया गया फैसला नहीं मानना चाहिए. मुकुल रॉय की टीएमसी वापसी ने बीजेपी को पश्चिम बंगाल में भारी झटका दिया है. मुकुल की वापसी टीएमसी के लिए कई लिहाज से अहम है.
साल 2017 में मुकुल रॉय टीएमसी छोड़कर बीजेपी में जाने वाले पार्टी के पहले नेता थे. इसके बाद ही टीएमसी में तेजी से भगदड़ मची और देखेते पार्टी के तमाम बड़े नेता ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिए. यह भी कहा जाता है कि इन्हें बीजेपी में लाने का मुकुल की अहम भूमिका थ. ऐसे में अब यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि मुकुल की वापसी से क्या फिर वैसी ही पुनरावृत्ति होगी. खासकर उन नेताओं की जो मुकुल के बाद टीएमसी छोड़कर बीजेपी में लेकर गए थे.
बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजे के बाद से कई नेता ने ममता बनर्जी से दोबारा पार्टी की सेवा का करने की गुहार लगा चुके हैं. वहीं, टीएमसी महासचिव कुणाल घोष ने तो यहां तक दावा कर चुके हैं कि बीजेपी के 10 विधायक और तीन सांसद पार्टी के संपर्क में हैं. पूर्व सिंचाई मंत्री राजीव बनर्जी भी बीजेपी की नीति की आलोचना कर चुके हैं और माना जा रहा है कि वो घर वापसी के जुगत में है. हालांकि, ममता ने शुभेंदु अधिकारी का नाम लिए बिना कहा कि चुनाव से पहले गद्दारी कर बीजेपी का हाथ मजबूत करने वालों को पार्टी कभी वापस नहीं लेगी.