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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब पाला बदल शुरू हो चुका है. कल बीरभूम और बर्दवान जिले से कई बीजेपी कार्यकर्ता टीएमसी में शामिल हो गए. बीरभूम में तो बाकायदा लाउडस्पीकर पर अनाउंस करते हुए बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बीजेपी छोड़ दी.
बीरभूम के लाभपुर के बिप्रतिकुरी गांव में लगभग 30 से 40 बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कल पूरे गांव में घूम-घूम कर लाउडस्पीकर पर अनाउंस किया कि टीएमसी के खिलाफ प्रचार करना उनकी गलती थी और वो इसके लिए माफी मांगते हैं. माफी मांगने के बाद स्थानीय टीएमसी नेतृत्व ने बाकायदा इन लोगों को वापस पार्टी में लेने की कवायद शुरू कर दी है. यहीं पर बीजेपी सवाल खड़ा कर रही है कि जिस तरीके से पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा शुरू हुई थी उससे डर कर लोग वापस टीएमसी में जा रहे हैं.
बीजेपी का आरोप है कि जिन 30 से 40 लोगों ने कल गांव में घूम-घूम कर अनाउंसमेंट किया है वो सभी चुनाव से पहले टीएमसी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे लेकिन चुनाव बाद जो हिंसा शुरू हुई उसके बाद घर से बाहर शरण लिए हुए थे. इन लोगों को टीएमसी के स्थानीय नेताओं ने कहा कि जब आप सार्वजनिक तौर पर माफी मांगेंगे तभी आपको वापस लेने पर विचार विमर्श किया जा सकता है. ऐसे में कोई उपाय न देख इन लोगों ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी.
इसी के बाद पश्चिम बंगाल के पूर्व वर्धमान से 150 बीजेपी कार्यकर्ताओं के टीएमसी में शामिल होने की खबर आई. केतुग्राम इलाके में बाकायदा टीएमसी के पार्टी ऑफिस में टीएमसी का झंडा पकड़कर इन 150 लोगों ने बीजेपी छोड़ टीएमसी ज्वाइन कर ली. बर्धमान के केतुग्राम से टीएमसी विधायक शेख शाहनवाज ने तृणमूल के शहीद भवन में इन सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं के हाथों में टीएमसी का झंडा पकड़ाया.
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वहीं, टीएमसी में लौटने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव में हार के बाद जब बीजेपी कार्यकर्ताओं के ऊपर अत्याचार हो रहा था तो बीजेपी का कोई भी बड़ा नेता इनको बचाने नहीं आया. इसीलिए इन्होंने टीएमसी और ममता बनर्जी की शरण ली है. टीएमसी में आने वालों में यहां के बीजेपी युवा मोर्चा मीडिया सेल के प्रमुख वीर प्रधान भी हैं. वीर प्रधान के मुताबिक, जब दिलीप घोष से इन्होंने अपनी समस्या की बात की तो उन्होंने कहा कि तुम लोग टीएमसी ज्वाइन कर लो, इसिलिए हमने टीएमसी ज्वाइन कर ली.
यह सभी पाला बदलने वाले ग्रासरूट स्तर के कार्यकर्ता हैं. लेकिन कुछ बड़े नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं जो पाला बदलने की कोशिश में लगे हुए हैं. इनमें सबसे बड़ा नाम राजीव बनर्जी का है, जिन्होंने कल ट्विटर पर टीएमसी के समर्थन में और बीजेपी के खिलाफ एक पोस्ट किया है.
इस बीच टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने दो दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि सिर्फ टीएमसी से बीजेपी में गए लोग टीएमसी में वापस आना चाहते हैं ऐसा नहीं है, बल्कि बीजेपी के भी कई विधायक उनके संपर्क में हैं, लेकिन इन सभी लोगों की टीएमसी में वापसी पर आखिरी फैसला ममता बनर्जी लेंगी.
दरअसल, कुछ इसी तरह का पाला बदल 2011 में ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी दिखा था. तब सीपीएम से टीएमसी में काफी सारे कार्यकर्ता और नेता जुड़े थे. उस दौरान भी राजनीतिक हिंसा हुई थी, लेकिन इस बार जिस तरह सार्वजनिक तरीके से अनाउंस करते हुए बीजेपी से टीएमसी में लोग आ रहे हैं वैसा नजारा पहले कभी देखने को नहीं मिला.