पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव होना है. इससे पहले ही यहां वादों की झड़ी लग गई. इसकी शुरुआत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुफ्त बिजली के साथ की. अब अकाली दल ने ऐलान किया है कि अगर पंजाब में उनकी सरकार बनती है, तो किसान आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवार में से एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी. इसके अलावा सभी बच्चों की मुफ्त पढ़ाई और पूरे परिवार का मेडिकल इंश्योरेंस सरकार कराएगी.
पंजाब में कृषि कानून और उसे लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहा विरोध बड़ा मुद्दा है. ऐसे में पार्टियां इसे भुनाने का मन बना चुकी हैं. इसी क्रम में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने अपने जन्मदिन पर बड़े ऐलान किए.
पहली मीटिंग में होंगे वादे पूरे
सुखबीर सिंह बादल ने ऐलान किया, अगर पंजाब में अकाली दल की सरकार बनी तो पहली कैबिनेट मीटिंग में ही किसान आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवार में से एक सदस्य को सरकारी नौकरी, सभी बच्चों की मुफ्त पढ़ाई और पूरे परिवार का सरकार खुद मेडिकल इंश्योरेंस कराएगी.
ये ऐलान हम पहले ही कर चुके- कांग्रेस सरकार
वहीं, सुखबीर बादल के इस ऐलान पर सत्ताधारी कांग्रेस ने अकाली दल पर तंज कसा. कांग्रेस ने कहा, राज्य सरकार पहले ही किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों को 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दे रही है. पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री भारत भूषण ने कहा, सुखबीर बादल सिर्फ लोगों को बरगलाने का काम कर रहे हैं. हालांकि, हकीकत ये है कि कांग्रेस सरकार ने जो वादे किए हैं, वे पूरे नहीं किए गए हैं. आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवारों के मुताबिक, अभी उन्हें ऐसी कोई मदद नहीं मिली.
आप ने साधा सुखबीर बादल पर निशाना
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पहले ही पंजाब में 300 यूनिट मुफ्त बिजली और किसानों को पूरी तरह से मुफ्त बिजली का ऐलान कर चुके हैं. लेकिन अब अकाली दल के ऐलान को लेकर आप ने सुखबीर बादल पर निशाना साधा है. आप विधायक कुलतार सिंह संधवां ने कहा, जब केंद्र सरकार ने काले कानून बनाए थे तो उस समय अकाली दल के नेता कहां थे और क्यों इन्होंने इन कानूनों पर हस्ताक्षर किए थे पहले इसका जवाब तो दे दें.
बादल ने किया था कृषि कानूनों का समर्थन- भाजपा
उधर, अकाली दल के ऐलान पर भाजपा नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा, सुखबीर बादल भी उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने शुरुआती दौर में कृषि कानूनों का समर्थन किया था. यहां तक कि कैबिनेट में हरसिमरत बादल मौजूद थी और उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भी इस पर हस्ताक्षर हैं. ऐसे में अगर सुखबीर बादल इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं, तो ये महज राजनीतिक स्टंट है.
ग्रेवाल ने कहा, अगर बादल किसानों का भला करना चाहते हैं तो वे उन्हें नौकरी दें, मुआवजा दें, फ्री शिक्षा दें लेकिन इस मुद्दे पर राजनीति ना करें.