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तीन लाख करोड़ का कर्ज, वादों की फेहरिस्त... भगवंत मान के सामने क्या हैं चुनौतियां

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बन गई है और मुख्यमंत्री का ताज भगवंत मान के सिर सजा है. पंजाब पर फिलहाल करीब तीन लाख करोड़ का कर्ज है, जिसके चलते भगवंत मान के सामने अपने लोकलुभाने वादों को अमलीजामा पहने की चुनौती खड़ी हो गई है. वहीं, भगवंत मान केंद्र के साथ बेहतर तालमेल कैसे बैठाएंगे यह भी देखना होगा.

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भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल
भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंजाब को कर्ज से निकालकर समृद्ध बनाने का चैलेंज
  • भगवंत मान के सामने खुद को साबित करने की चुनौती
  • पंजाब में रेत-केबल माफियाओं पर लगाम क्या लगेगी

पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद आम आदमी पार्टी सरकार बन गई है. कभी टेलीविजन पर बतौर स्टैंडअप कॉमेडियन दिखने वाले भगवंत मान अब पंजाब के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. भगवंत मान बुधवार को सीएम पद की शपथ शहीद भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में लेने वाले हैं. पंजाब में सत्ता की कमान संभालने वाले भगवंत मान के सामने सरकार चलाने की चुनौतियां किसी अग्निपथ से कम नहीं होगी.

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पंजाब में साल 2020 में अपराधों में 13 फीसदी का इजाफा हुआ. इतना ही नहीं सूबे में ड्रग्स भी बड़ी समस्या है. वहीं, पंजाब पौने 3 लाख करोड़ के भारी भरकम कर्ज में भी डूबा हुआ है, जो राज्य की जीडीपी का करीब 50 फीसदी है. पंजाब में प्रति व्यक्ति आय भी पिछले दो दशकों से लगातार गिरी है. पंजाब में आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट मुफ्त, बिजली, पानी और 18 साल की महिलाओं को एक हजार रुपये देने जैसे तमाम लोकलुभाने वायदे कर रखे हैं. ऐसे में भगवंत मान के समक्ष जनता से किए इन वादों को पूरा करने के लिए आर्थिक चुनौतियां भी हैं. 

भगवंत के सामने खुद को साबित करने की चुनौती

आम आदमी पार्टी ने पंजाब के लोगों से स्वच्छ, पारदर्शी और ईमानदार प्रशासन देना का दावा किया है. साथ ही पंजाब की खराब आर्थिक स्थिति और लालफीताशाही से छुटकारा दिलाने का वादा कर रखा है. वहीं, पंजाब में सत्ता की कमान संभालने जा रहे भगवंत मान सिंह भले ही दो बार लोकसभा सांसद रहे हैं, लेकिन सरकार चलाने के मामले में अब तक उनके पास कोई अनुभव नहीं है. ऐसे में भगवंत मान के सामने सीमावर्ती राज्य पंजाब पर शासन करने और खुद को भी साबित करने की चुनौती होगी.

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वहीं, भगवंत मान ने कहा कि हम जानते हैं कि प्रशासन कैसे चलाना है. सात सालों तक लोकसभा का सदस्य रहा हूं और हमारे पास अनुभव है. हालांकि, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल भी ऐसे ही मुख्यमंत्री बने थे और सरकार चलाकर खुद को साबित किया है. 

पंजाब को कर्ज से बाहर निकालाने की चुनौती

पंजाब मौजूदा समय में कर्ज के बोझ में दबा हुआ है. मौजूदा समय में पंजाब पर 2.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है, जो राज्य की जीडीपी का 56 फीसदी है. 2020-21 में, पंजाब सरकार ने अपने कर राजस्व का 54 फीसदी अपने कर्ज पर ब्याज चुकाने पर खर्च किया. पंजाब में प्रति व्यक्ति आय भी पिछले दो दशकों से लगातार गिर रही है और इस मामले में राज्य का नंबर 3 से फिसलकर 19 वें नंबर पर पहुंच गया है. वहीं, पंजाब में तीन लाख करोड़ का कर्ज है. 

ऐसे में भगवंत मान को सबसे बड़ा और पहला चैलेंज राज्य सरकार को वित्तीय संकट से उबारना होगा. भगवंत मान को अपने लोकलुभाने चुनावी और मुफ्त उपहारों के वादों को पूरा करने. सूबे को कर्ज से उबारने के लिए राजस्व संसाधन पैदा करने, घटती प्रति व्यक्ति आय, केंद्रीय धन पर बढ़ती निर्भरता, पूंजी निर्माण में कम निवेश की चुनौतियां से निपटने और पंजाब में आर्थिक रूप में समृद्ध बनाने की चुनौती है. 

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अपराध और माफिया राज से निजात दिलाने का चैलेंज

पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, रेत-बजरी और केबल माफ़िया को लेकर लोगों में खासा असंतोष रहा है. पंजाब में लगातार बढ़ रहे अपराधिक घटनाओं पर रोकने की चुनौती है तो माफिया राज से पंजाब को निजात दिलाने और बेअदबी मामले के आरोपियों के सजा दिलाने की चुनौती है. साल 2021 के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अपराधों में 13 फीसदी का इजाफा हुआ था. भगवंत पहले ही ऐलान कर रखे हैं कि माननीयों की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों को हटाकर उन्हें जनता की सुरक्षा में लगाया जाएगा, पर इसका कितना असर जमीन पर पड़ेगा, इसका इम्तिहान होना अभी बाकी है. 

वहीं, पंजाब में शराब हो या रेत माफियाओं के चुंगल में फंसा हुआ है. राज्य में अवैध रेत व बालू खनन पर भले ही चन्नी ने थोड़ा नियंत्रण किया हो, लेकिन ये समस्या काफी बड़ी है. रेत की कीमतों को माफिया नियंत्रित करते हैं. ऐसे में भगवंत मान के सामने रेत और शराब माफियाओं पर लगाम लगने की चुनौती है. बेअदबी मामले के दोषियों को सज़ा न दिला पाना भी प्रदेश में एक बड़ा सियासी मुद्दा रहा है और भगवंत मान के सामने ये चुनौती होगी.

पंजाब को ड्रग्स मुक्त बनाने की चुनौती

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पंजाब में ड्रग्स भी बड़ी समस्या है. पंजाब को ड्रग्स मुक्त बनाना भगवंत मान के लिए काफी बड़ी चुनौती है. कांग्रेस ने पंजाब में सत्ता में रहते हुए इस समस्या के निपटने के लिए कई उपाय अपनाए हैं, लेकिन अभी ड्रग्स माफिया सक्रिय है. पिछले सात सालों में नारकोटिक्स क्रंटोल ब्यूरो (एनसीबी) ने तीन हजार 836 किलो ड्रग्स पकड़ी है. यहां पाकिस्तान बॉर्डर से भी ड्रग्स की सप्लाई होती है. साल 2017 से 20 तक पंजाब बॉर्डर पर 1235 किलो ड्रग्स पकड़ी गई. पंजाब के युवा बड़ी संख्या में नशे की लत के शिकार है. ऐसे में भगवंत मान के सामने पंजाब के युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालने और ड्रग्स मुक्त पंजाब बनाने की चुनौती है.

वादों को निभाने की भी बड़ी चुनौती

आम आदमी पार्टी की सरकार के सामने अपने वादों को निभाने की भी बड़ी चुनौती होगी और इसके लिए एक बड़े सरकारी खर्च की भी जरूरत पड़ेगी. आम आदमी पार्टी ने वादा किया है कि 18 साल से ऊपर की हर महिला को हर महीने 1 हजार रुपये दिये जाएंगे. पंजाब में 18 साल से ऊपर की करीब 99 लाख महिलाएं हैं. अब अगर इन सबको हर महीने एक हजार रुपये मिलेंगे, तो खर्च 990 करोड़ रुपये खर्च होंगे और हर साल 11 हजार 880 करोड़ रुपये खर्च होंगे. वहीं, राज्य में सभी को 300 यूनिट बिजली दी जाने है. इसके अलावा विकास के इन्फ्रास्ट्रक्चर के दिशा में कदम बढ़ाने की चुनौती है, जिनमें स्कूल से लेकर अस्पताल और सड़के तक हैं.

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केंद्र बनाम राज्य में क्या बढ़ेगा टकराव

राज्य के विकास के लिए राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय होना बेहद ज़रूरी है. खासकर तब जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग पार्टियों की सरकार हो. दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और मोदी सरकार के बीच टकराव जगजाहिर है. ऐसे में क्या आने वाले वक्त में पंजाब भी इसी तरह की किसी मुश्किल में फंस सकता है. केंद्र के साथ पंजाब के रिश्तों में तनाव कोई नई बात नहीं है. जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब अकाली दल हमेशा आरोप लगाती थी कि केंद्र सरकार पंजाब के खिलाफ है. वहीं, अब केंद्र में बीजेपी है तो राज्य में आम आदमी पार्टी है.

भगवंत मान के सामने केंद्र के साथ बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत होगी, लेकिन बड़ी चुनौती यह होगी कि वो पंजाब में बीएसएफ के दायरे का विस्तार करने और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब के अधिकारियों का कोटा खत्म करने जैसे मुद्दों को कैसे सुलझाते हैं. दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है और उसके पास सीमित शक्तियां हैं जबकि पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में आने वाली सरकार के पास दिल्ली सरकार के मुकाबले अधिक शक्तियां होंगी. ऐसे में देखना है कि राज्य और केंद्र के बीच किस तरह से संतुलन बनाकर रखते हैं.  

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