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सिद्धू जेल में, चन्नी आउट ऑफ फोकस... राहुल गांधी पंजाब में यात्रा के जरिए उम्मीद की किरण जगा पाएंगे?

कन्याकुमारी से कश्मीर तक के लिए निकली कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा मंगलवार शाम पंजाब में दाखिल हो जाएगी. राहुल गांधी दस दिनों तक पंजाब में रहकर पदयात्रा करेंगे और कांग्रेस के खिसके सियासी जनाधार को दोबारा से मजबूत करने की कवायद करते नजर आएंगे, लेकिन उनके सामने सियासी चुनौती भी कई खड़ी हैं?

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भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी
भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी

कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' मंगलवार को हरियाणा से पंजाब में प्रवेश करेगी. राहुल गांधी स्वर्ण मंदिर में माथा टेक कर शंभू बॉर्डर के रास्ते पंजाब में एंट्री करेंगे और यहां पर दस दिनों तक यात्रा रहेगी. पंजाब में भारत जोड़ो यात्रा ऐसे समय दाखिल हो रही है जब कांग्रेस कई सियासी चुनौतियों से जूझ रही है. करीब छह महीने पहले ही कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी है और उसके तमाम दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं. 2024 का लोकसभा चुनाव सिर पर है और पार्टी के चेहरे 'आउट आफ स्क्रीन' हैं. ऐसे में राहुल गांधी दस दिनों तक पैदल चलकर पंजाब में कांग्रेस को दोबारा से खड़ा कर पाएंगे? 

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पंजाब में राहुल गांधी दस दिन तक रहेंगे

भारत जोड़ो यात्रा अंबाला के रास्ते आज मंगलवार शाम को पंजाब के फतेहगढ़ में दाखिल होगी. राहुल गांधी बुधवार को गुरुद्वारा फतहेगढ़ साहिब में सुबह छह बजे माथा टेककर पंजाब में पदयात्रा शुरू करेंगे. गोबिंदगढ़, लुधियाना, जालंधर, आदमपुर से होते हुए हिमाचल प्रदेश में दाखिल होगी और अगले दिन पठानकोट में राहुल गांधी रैली को संबोधित करेंगे. इसके बाद यात्रा जम्मू-कश्मीर सीमा में प्रवेश कर जाएगी. इस तरह से दस दिनों तक पंजाब में रहकर राहुल गांधी कांग्रेस के खिसके सियासी आधार को दोबारा से वापस लाने के लिए मशक्कत करते नजर आएंगे. 

हार से हताश कांग्रेस का बढे़गा मनोबल? 
पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से सिर्फ हार ही नहीं बल्कि कांग्रेस को सत्ता भी गंवानी पड़ी है. राहुल गांधी के सामने पंजाब में हार से हताश कांग्रेस कार्यकर्ताओं के गिरे मनोबल को फिर से बढ़ाने की चुनौती होगी. आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से राज्य में वह मजबूत हुई है और विधानसभा की तरह लोकसभा में भी नतीजे दोहराने की कवायद में है. ऐसे में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी को दस दिनों तक पंजाब में रहकर पार्टी कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद करने होंगे ताकि अगले साल 2024 के चुनाव में पार्टी बीजेपी और आम आदमी पार्टी के साथ दोहरा मुकाबला कर सके. इतना ही नहीं अपने खिसके हुए जनाधार को भी वापस लाने की भी चुनौती है. 

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कांग्रेस के दिग्गज छोड़ चुके हाथ का साथ
पंजाब में राहुल गांधी ऐसे समय में पहुंच रहे हैं जब कांग्रेस के हाथों से सिर्फ सत्ता ही नहीं गई बल्कि पार्टी के तमाम दिग्गज नेता भी साथ छोड़ चुके हैं. कैप्टन अमरिंदर सिंह से लेकर अश्वनी कुमार, सुनील जाखड़, बलबीर सिंह सिद्धू, जयवीर शेरगिल जैसे नेता कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. सांसद मनीष तिवारी की नाराजगी जगजाहिर है तो चरणजीत सिंह चन्नी सीन से गायब हैं जबकि नवजोत सिंह सिद्धू जेल में है. ऐसे में कांग्रेस का चेहरा प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वडिंग हैं. इन दोनों नेताओं के बीच भी रिश्ते किसी से छिपे नहीं है.

कांग्रेस के पास पंजाब में कोई कद्दावर नेता नहीं है, जिसे आगे करके दोबारा से मजबूत किया जा सके. राहुल गांधी को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ऐसे नेता की तलाश करनी होगी, जिसे आगे कर कांग्रेस भविष्य में आगे बढ़ सके. इसके अलावा गुटों में बट चुकी कांग्रेस को एकसूत्र में पिरोने का काम करना होगा. पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को चेहरा बनाने का दांव सफल नहीं रहा था. चन्नी विदेश से लौटकर वापस आ चुके हैं और भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी संग नजर आ सकते हैं तो बाजवा और वडिंग भी कदमताल करेंगे. ऐसे में देखना होगा कि राहुल गांधी किसे आगे बढ़ाते हैं? 

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2024 में कांग्रेस के सामने चुनौती 
पंजाब में राहुल गांधी के सामने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए सियासी जमीन तैयार करने की चुनौती है. 2019 के चुनाव में मोदी का जादू जिन चुनिंदा राज्यों में नहीं चला था, उनमें से एक पंजाब भी था. कांग्रेस पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से आठ सीटें जीतने में कामयाब रही थी जबकि बीजेपी-अकाली दल को दो-दो सीटें मिली थीं और एक सीट आम आदमी पार्टी को मिली थी. 2022 के बाद सियासी हालात पंजाब के बदल गए हैं और अब आम आदमी पार्टी के सामने कांग्रेस को पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजे को दोहारने की चुनौती खड़ी हो गई है. राहुल गांधी पंजाब में अपनी यात्रा के जरिए क्या 2024 के लिए राजनीति जमीन तैयार कर पाएंगे, जिसके जरिए कांग्रेस अपना पुराना प्रदर्शन दोहरा सके. 

पंजाब से कांग्रेस को काफी उम्मीदें
हालांकि, राहुल गांधी किसान से लेकर रोजगार तक का मुद्दा उठा रहे हैं. पंजाब में हिंदुत्व की सियासत को सिख समुदाय पंसद नहीं करते हैं, जिसके चलते राहुल गांधी के लिए मौका है कि अपनी यात्रा के जरिए कांग्रेस को दोबारा से मजबूत कर सकें. पश्चिमी यूपी और हरियाणा में जिस तरह से राहुल गांधी की यात्रा को जनसमर्थन मिला है, उससे कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं और उन्हें पंजाब में भी उम्मीद नजर आ रही है. किसानों के मुद्दे अभी भी जस से तस बने हुए हैं जबकि किसान आंदोलन का आगाज पंजाब से ही हुआ था. इसके अलावा राहुल गांधी जिस समुदाय से सियासी संदेश देने के लिए स्वर्ण मंदिर से माथा टेकर अपनी यात्रा का आगाज कर रहे हैं, उससे कांग्रेस को काफी उम्मीद है. 

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