पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी (BSP) और शिरोमणि अकाली दल के बीच शनिवार को हुए गठबंधन के ऐलान पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने लोगों को बधाई देते हुए दावा किया है कि इस गठबंधन के बाद राज्य में नए युग की शुरुआत होगी. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा, ''पंजाब में आज शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी द्वारा घोषित गठबंधन एक नया राजनीतिक व सामाजिक पहल है, जो निश्चय ही राज्य में जनता के बहु-प्रतीक्षित विकास, प्रगति व खुशहाली के नए युग की शुरुआत करेगा. इस ऐतिहासिक कदम के लिए लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.''
उन्होंने आगे कहा कि वैसे तो पंजाब में समाज का हर तबका कांग्रेस पार्टी के शासन में यहां व्याप्त गरीबी, भ्रष्टाचार व बेरोजगारी आदि से जूझ रहा है, लेकिन इसकी सबसे ज्यादा मार दलितों, किसानों, युवाओं व महिलाओं आदि पर पड़ रही है, जिससे मुक्ति पाने के लिए अपने इस गठबंधन को कामयाब बनाना बहुत जरूरी है. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की समस्त जनता से पुरजोर अपील है कि वे अकाली दल व बी.एस.पी. के बीच आज हुए इस ऐतिहासिक गठबंधन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए साल 2022 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस गठबंधन की सरकार बनवाने में पूरे जी-जान से अभी से ही जुट जाएं.
वहीं, अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल ने ट्वीट कर कहा, ''एसएडी और बीएसपी ने मिलकर फैसला लिया है कि बीएसपी 117 सीटों में से 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जिसमें से मालवा में सात सीटें, दोआबा में आठ और माझा में पांच सीटें शामिल हैं. बेहतर तरीके से कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया जाएगा.''
बता दें कि शिरोमणि अकाली दल और बीएसपी ने शनिवार को गठबंधन का ऐलान किया है. गठबंधन की घोषणा करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह पंजाब की राजनीति में नया सवेरा है. अकाली दल और बीएसपी के बीच में सीटों का भी बंटवारा हो गया है. मायावती नीत बीएसपी पंजाब में 117 विधानसभा सीटों में से 20 पर चुनाव लड़ेगी, जबकि अन्य सीटों पर अकाली दल अपने उम्मीदवार उतारेगा. जो सीटें बीएसपी को दी गई हैं, वे सीटें- जालंधर उत्तर, करतारपुर साहिब, जालंधर पश्चिम,होशियारपुर सदर, दासुया, रुपनगर जिले में चमकौर साहिब, पठानकोट जिले में बस्सी पठाना, सुजानपुर, अमृतसर उत्तर, फगवाड़ा और अमृतसर मध्य आदि हैं. केंद्र सरकार के तीनों नए कृषि कानूनों के मुद्दे पर पिछले साल अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन टूट गया था.