केंद्र सरकार ने शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जेड सुरक्षा वापस ले ली है. अकाली दल ने मजीठिया को दी गई सुरक्षा वापस लेने की टाइमिंग पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि केंद्र का यह फैसला राजनीति से प्रेरित है. केंद्र सरकार ने मजीठिया की सुरक्षा को लेकर पंजाब सरकार के पाले में गेंद डाल दी है. अब पंजाब सरकार बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा को रिव्यू करने के बाद इस पर फैसला लेगी.
केंद्र की ओर से बिक्रम सिंह मजीठिया को सीआईएसएफ की सुरक्षा प्रदान की गई थी. सीआईएसएफ के जवान बिक्रम मजीठिया की सुरक्षा में तैनात थे. मजीठिया गैंगस्टरों और विदेशी आतंकियों की हिट लिस्ट में चल रहे थे और लगातार उन्हें धमकियां मिल रही थीं. जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद राज्य के डीजीपी ऑफिस में उनकी सुरक्षा को रिव्यू करने का फैसला लिया गया है.
इस संबंध में जल्दी ही डीजीपी दिनकर गुप्ता समेत सुरक्षा विंग और इंटेलिजेंस विंग के आला अधिकारियों की संयुक्त रूप से एक अहम बैठक में इस फैसले को अंतिम रूप दिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक मजीठिया को वाई या फिर जेड कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की जा सकती है.
माना जा रहा है की मजीठिया की सुरक्षा वापिस लेने का फैसला बीजेपी के वरिष्ठ नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल के राजपुरा कार्यालय में की गई तोड़फोड़ के बाद लिया गया है. पंजाब पुलिस विभाग को वीआईपी लोगों को दी गई सुरक्षा रिव्यू करने की जरूरत इसलिए भी पड़ी क्योंकि कई लोग सुरक्षा का दुरुपयोग कर रहे थे.
इसका ताजा उदाहरण हेरोइन और हथियारों की तस्करी में लिप्त पाए गए पूर्व अकाली दल सरपंच गुरदीप सिंह राणो की गिरफ्तारी है. उनके कब्जे से तीन अवैध हथियार और करोड़ों रुपए की हेरोइन बरामद की गई थी. इस पूर्व सरपंच को पुलिस सुरक्षा भी मुहैया करवाई जा रही थी.
हालांकि पंजाब पुलिस विभाग पिछले दो सालों के दौरान अट्ठारह सौ पुलिसकर्मियों को वीआईपी लोगों की सुरक्षा से हटा चुका है लेकिन अभी भी 7000 पुलिसकर्मी सिर्फ वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा में लगे हैं. कुछ नेताओं की सुरक्षा कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी वापिस ली गई थी.
सूत्रों के मुताबिक जल्द ही पंजाब पुलिस 150 और पुलिसकर्मियों को वीआईपी सुरक्षा से वापिस विभाग में बुला सकती है. जहां तक राजनेताओं की बात है तो पंजाब में अकाली दल, कांग्रेस और बीजेपी सभी पार्टियों के नेताओं के पास पुलिस सुरक्षा है. आम आदमी पार्टी एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके नेताओं के पास कोई भी अतिरिक्त सुरक्षा नहीं है.