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पराली जलाने के मामलों में कब आएगी गिरावट? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

पंजाब में किसान कब तक धान की पराली जलाएंगे? इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के बाद मामलों में कमी आने की उम्मीद है. सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से उपलब्ध एक दशक पुराना डेटा भी संकेत देता है कि 15 नवंबर के बाद मामलों में हमेशा गिरावट आई है.

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पंजाब में पराली जलाने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं (फाइल फोटो)
पंजाब में पराली जलाने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पंजाब में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. गुरुवार को खेतों में आग लगने की 639 घटनाएं सामने आईं. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2022 और 2021 में एक ही दिन के दौरान क्रमशः 1778 और 5079 मामले दर्ज किए थे. इसके साथ ही पंजाब में पराली जलाने के मामले गुरुवार को 23,620 के आंकड़े को छू गए. राज्य में पिछले वर्ष (15 सितंबर से 9 नवंबर के बीच) 34,868 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं साल 2021 में 47,409 मामले दर्ज किए गए थे.

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पर्यावरणविदों का कहना है कि मौजूदा खरीफ सीजन पिछले सीजन की तुलना में असामान्य है. इस वर्ष पराली जलाने के कुल मामलों में कमी आने का एक कारण यह था कि मानसून के मौसम की देर से वापसी और धान बेल्ट में बाढ़ के बाद धान की फसल को अलग-अलग अंतराल पर दोबारा लगाया गया था.

पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग में पर्यावरण स्वास्थ्य के प्रोफेसर डॉ. रवीन्द्र खैवाल कहते हैं, ''कटाई में देरी से धान की पराली जलाने की अवधि और बढ़ जाएगी.''

उधर, फसल की कटाई में देरी के बाद पंजाब सरकार भी धान की खरीद 15 दिनों तक बढ़ाने की संभावना है. आम तौर पर धान की खरीद 30 नवंबर तक चलती है. पंजाब में धान की एक-चौथाई फसल की कटाई अभी बाकी है.

पंजाब में किसान कब तक धान की पराली जलाएंगे? इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के बाद मामलों में कमी आने की उम्मीद है. सामुदायिक चिकित्सा विभाग, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से उपलब्ध एक दशक पुराना डेटा भी संकेत देता है कि 15 नवंबर के बाद मामलों में हमेशा गिरावट आई है.

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15 नवंबर के बाद मामलों में आती है गिरावट

डॉ. रवीन्द्र खैवाल कहते हैं, "10 साल के रुझान से पता चलता है कि हर साल 15 नवंबर के बाद खेतों में आग लगने के मामलों में गिरावट आती है. लेकिन यह साल असामान्य था. मानसून की वापसी देर से हुई और बाढ़ की स्थिति थी. चावल की फसल की रोपाई में देरी हुई जिन इलाकों में बाढ़ आ गई थी. पिछले सप्ताह के दौरान पराली जलाने के मामले बढ़ गए क्योंकि धान की फसल अपने चरम पर थी. दिवाली के बाद खेतों में आग लगने के मामलों में कमी आने की संभावना है."

उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि दिवाली के बाद इसमें गिरावट आएगी. 2012 में 80000 मामले थे लेकिन 2013 में एक महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई थी. 2019 के रुझानों से पता चला कि कुल मामले कम हो गए. 2022 में कोविड महामारी के बाद मामले बढ़ने लगे. इस वर्ष मामलों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में कम होगी."

दिवाली तक बारिश नहीं: IMD

भारतीय मौसम विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि दिवाली तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है. हालांकि, हिमाचल की सीमा से लगे उत्तरी पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है. आईएमडी, चंडीगढ़ के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया, "पश्चिमी विक्षोभ बहुत मजबूत नहीं है. बारिश की संभावना बहुत कमजोर है. उत्तरी पंजाब के कुछ हिस्सों के अलावा हिमाचल के करीब स्थित हरियाणा के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है. बारिश से प्रदूषण से राहत मिल सकती है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है."

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