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किसान आंदोलन से नुकसान, प्रकाश पर्व पर PM मोदी को आमंत्रित नहीं कर सकते- SGPC

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कहा कि एसजीपीसी यानि सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तमाम सिखों की साझी संस्था है और इस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लाए गए केंद्रीय कृषि कानूनों की वजह से पंजाब के किसानों का खासा नुकसान हो रहा है.

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पीएम मोदी को प्रकाश पर्व पर न्योता नहीं देगी SGPC (फाइल-पीटीआई)
पीएम मोदी को प्रकाश पर्व पर न्योता नहीं देगी SGPC (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 3 कृषि कानूनों के खिलाफ किसान कर रहे आंदोलन
  • आंदोलनरत किसानों में बड़ी संख्या में पंजाब के किसान
  • प्रकाश पर्व पर PM को आमंत्रित नहीं कर सकतेः SGPC

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन अभी जारी है. हालांकि आंदोलन को खत्म करने को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत जारी है. इस बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बतौर अतिथि आमंत्रित नहीं किया जा सकता.

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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कहा कि एसजीपीसी यानि सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तमाम सिखों की साझी संस्था है और इस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लाए गए केंद्रीय कृषि कानूनों की वजह से पंजाब के किसानों का खासा नुकसान हो रहा है. उसे देखते हुए इस बार श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व के मौके पर पीएम मोदी को बतौर अतिथि आमंत्रित नहीं किया जा सकता.

SC ने जताई चिंता

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों और सरकार की बातचीत का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है. सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को किसानों के आंदोलन को लेकर चिंता जताई. हालांकि, सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही यह गतिरोध समाप्त होगा.

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3 नए कृषि कानूनों की संवैधानिक वैधता को लेकर कुछ वकीलों की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है. इस पर आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम किसान आंदोलन और कृषि कानूनों की अर्जी पर सोमवार को सुनवाई करेंगे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोबडे ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें हालात में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है.

चीफ जस्टिस की टिप्पणी पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम बात कर रहे हैं. जबकि अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष किसी मुद्दे पर सहमत हो जाएंगे. इस पर चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि हम हालात से वाकिफ हैं और चाहते हैं कि बातचीत और बढ़े. हम हालात पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए हैं.

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पिछले 41 दिनों से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर केंद्र सरकार के 3 कृषि कानूनों को वापस लेने समेत अपनी मांगों को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं. अब तक किसानों और सरकार में आठ दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका. अब 8 जनवरी को नौंवे दौर की वार्ता का इंतजार है.

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