Farmers Protest: कृषि कानूनों को लेकर जहां किसान दिल्ली कि सरहदों पर डेरा डाले हुए हैं तो वहीं उनकी पत्नियों ने खेतों में मोर्चा संभाला हुआ है. सरहदी गांवों थोबा, मलकपुर, दरिया मूसा में कुछ औरतें खेतों में काम करती दिखाई दीं. कोई खेतों में स्प्रे कर रहा है तो कोई जानवारों के लिए चारा काट रहा है.
किसान सतनाम सिंह की पत्नी सरबजीत कौर पशुओं के लिए चारा काट रही थीं. कुलविंदर कौर पत्नी साहिब कौर गेहूं की फसल में खाद डाल रही थीं. इन दोनों के साथ बलवीर कौर पत्नी दलबीर सिंह भी खेतों में दिखाई दीं. इन सभी का कहना है कि वे आखिरी सांस तक अपना संघर्ष जारी रखेंगी.
उन्होंने बताया कि पहले से उनका काम बहुत बढ़ गया है, लेकिन फिर भी वह धरने पर बैठे अपने पतियों की चिंता को खत्म करने लिए खुद खेतों में उतरी हैं. घर के साथ-साथ खेतों व पशुओं को भी संभाल रही हैं.
इन महिलाओं ने कहा कि वह अपने पतियों का इंतजार कर रही हैं कि कब वो जीत हासिल कर घर लौटेंगे. फिलहाल हम घर संभालने, खेतों व पशुओं को देखने के अलावा किसान जत्थेबंदियों के लिए भी काम कर रही हैं. साथ ही दिल्ली धरने में बैठे किसानों के खाने-पीने के प्रबंध के लिए फंड इकट्ठा करने भी जाती हैं.
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मालूम हो कि दिल्ली बॉर्डर पर कई दिनों से डेरा जमाए किसान अब भी डटे हुए हैं. किसान आंदोलन के जरिए कृषि कानून में बदलाव की मांग की जा रही है. पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान बड़ी संख्या में सड़कों पर हैं.
पंजाब के दर्जनों किसान संगठनों ने मुख्य रूप से इस आंदोलन को बुना है. इन्हीं संगठनों के हजारों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली में राशन-पानी लेकर दिल्ली बॉर्डर पर जमा हैं, जिनका दावा है कि वो अगले 6 महीने का राशन साथ लाए हैं.
कृषि कानून के खिलाफ पंजाब-हरियाणा की हजारों महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और युवा सड़कों पर उतरे हुए हैं. गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा उन राज्यों में से एक हैं जो बड़ी संख्या में सरकार को फसल उपलब्ध कराते हैं.
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