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श्री मुक्तसर साहिब में मेला माघी का मुख्य आकर्षण घोड़ा मंडी, बड़े पैमाने पर होती है खरीद-फरोख्त

पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में मेला माघी के दौरान लगने वाली घोड़ा मंडी मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गई है. पंजाब के साथ लगते हुए राज्यों हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश में महाराष्ट्र से भी घोड़ा पालक और घोड़ा प्रेमी यहां पर अपने घोड़े के साथ पहुंच रहे हैं. इस घोड़ा मंडी में सबसे अधिक मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों को लेकर उनके पालक पहुंच रहे हैं.

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यहां पर दूर-दूर से घोड़े को खरीदने-बेचने वाले घोड़ा प्रेमी पहुंचते हैं.
यहां पर दूर-दूर से घोड़े को खरीदने-बेचने वाले घोड़ा प्रेमी पहुंचते हैं.

पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में मेला माघी की शुरुआत हो चुकी है. इसके साथ ही मेला माघी के दौरान लगने वाली घोड़ा मंडी यहां का मुख्य आकर्षण है, जो 17 जनवरी तक चलेगी. इसमें पंजाब के सभी जिलों से घोड़ा पालक और घोड़ा प्रेमी इस मंडी में पहुंचे हुए हैं. पंजाब के साथ लगते हुए राज्यों हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश में महाराष्ट्र से भी घोड़ा पालक और घोड़ा प्रेमी यहां पर अपने घोड़े के साथ पहुंच रहे हैं. 

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बता दें कि यह घोड़ा मंडी पंजाब की सबसे मशहूर घोड़ा मंडी है, जिसमें घोड़ों का बड़ी संख्या में खरीद-फरोक्त होती है. यहां पर दूर-दूर से घोड़े को खरीदने-बेचने वाले घोड़ा प्रेमी पहुंचते हैं. इस घोड़ा मंडी में सबसे अधिक मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों को लेकर उनके पालक पहुंच रहे हैं.

वहीं, श्री मुक्तसर साहिब की रहने वाली दो बहनें कमलप्रीत कौर और अमनप्रीत कौर अपने मारवाड़ी किस्म की नस्ल के घोड़े शान के साथ इस मंडी में पहुंची हैं. उन्होंने अपने इस मारवाड़ी घोड़े के लिए विशेष टेंट लगवाकर घोड़े को लोगों के सामने पेश किया है. 

आजतक के साथ बातचीत करते हुए दोनों बहनों ने कहा कि यह एक स्टेलियन घोड़ा शान है. इस घोड़े की उम्र करीब साढ़े 5 साल है. इसकी ऊंचाई 65 इंच तक है. हम लोग इस घोड़े को हर साल की तरह इस साल भी इस घोड़ा मंडी में लेकर आए हैं. 

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कोमल ने बताया कि लोग हमारे घोड़े को देखकर खुश हो रहे हैं. हमारे पास 13 से 14 और भी घोड़े-घोड़ियां हैं. हमारे दादा-परदादा फिर पिताजी घोड़ों के शौकीन थे. शुरू से ही हम अपने घर में घोड़े-घोड़िया रखते आ रहे हैं. मैं 5 साल की उम्र से ही घोड़े की सवारी कर रही हूं. 

कोमल ने आगे कहा कि घोड़े के साथ मेरा बचपन से ही बहुत ज्यादा लगाव रहा है. हम अपने घोड़े-घोड़ियों की खुराक का भी ध्यान रखते हैं. इनको सुबह-शाम राइड भी करवाते हैं. 

इनपुट- अशफाक धुड्डी

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