अमेरिका से निर्वासित किए गए 112 अवैध भारतीय प्रवासियों में शामिल जतिंदर सिंह ने अपनी आपबीती सुनाई है. रविवार को अमृतसर लौटे जतिंदर ने बताया कि अमेरिका के डिटेंशन कैंप में दो हफ्ते की कैद के दौरान उन्हें टॉर्चर किया गया और सही भोजन भी नहीं दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने जबरन उनकी पगड़ी उतरवाई और उसे कूड़ेदान में फेंक दिया.
36 घंटे बेड़ियों में जकड़े रहे जतिंदर
23 वर्षीय जतिंदर सिंह ने बताया कि अमृतसर में रोजगार की कमी के कारण उन्होंने विदेश में बसने का सपना देखा था. उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्हें अमेरिका से निर्वासित कर वापस लाया जा रहा था, तब सैन्य विमान में उन्हें 36 घंटे तक बेड़ियों में जकड़कर रखा गया.
आजतक से बात करते हुए उन्होंने बताया, '27 नवंबर को जब मैं अमेरिकी सीमा में प्रवेश कर रहा था, तब मुझे पकड़ लिया गया और दो हफ्ते के लिए डिटेंशन कैंप में भेज दिया गया. मेरी आपत्ति के बावजूद उन्होंने मेरी पगड़ी उतरवा दी. उन्होंने कहा कि यह उनका नियम है और पगड़ी को कूड़ेदान में फेंक दिया.'
डिटेंशन कैंप में किया गया अमानवीय बर्ताव
उन्होंने दावा किया कि डिटेंशन कैंप में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया. जतिंदर ने कहा, 'वहां ठंड बढ़ाने के लिए एयर कंडीशनर का तापमान कम कर दिया गया और हीटर की गर्मी बढ़ा दी गई, जिससे मेरी त्वचा सूख गई. खाने के नाम पर मुझे सिर्फ दो बार चिप्स और जूस दिया गया.'
एजेंट को पैसे देने के लिए सब कुछ बेच दिया
जतिंदर ने बताया कि नवंबर 2024 में उनके दोस्तों की सलाह पर उन्होंने एक एजेंट से संपर्क किया, जिसने उन्हें अमेरिका पहुंचाने का वादा किया था. इसके लिए उन्होंने एजेंट को 50 लाख रुपये दिए. उन्होंने कहा, 'मेरे परिवार ने अपनी सारी जमीन (1.3 एकड़) बेच दी और मैंने एजेंट को 22 लाख रुपये एडवांस में दिए. मैंने अपनी दो शादीशुदा बहनों के गहने भी बेच दिए गए ताकि एजेंट की पूरी रकम चुकाई जा सके.'
एजेंट ने जतिंदर को बताया कि वह पहले पनामा के जंगलों को तीन दिनों तक कवर करके अमेरिका में प्रवेश करेंगे और विमान में बैठकर मैक्सिको जाएंगे, जहां से वह तिजुआना से अमेरिकी सीमा में प्रवेश करेंगे. अमेरिका की सीमा पार करने के बाद उन्हें बॉर्डर पुलिस ने पकड़ लिया और हिरासत केंद्र में डाल दिया, जहां उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.