महाराष्ट्र के डॉक्टर हिममतराव बावस्कर द्वारा पंजाब और हरियाणा के गेहूं में अधिक सेलेनियम (Selenium) की मात्रा को बाल झड़ने की वजह बताने के दावे को किसान नेताओं और कृषि विशेषज्ञों ने सिरे से खारिज कर दिया है. डॉक्टर बावस्कर ने दावा किया था कि पंजाब और हरियाणा से आने वाले गेहूं में सेलेनियम की अधिक मात्रा के कारण महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में युवा तेजी से गंजेपन (Alopecia Totalis) का शिकार हो रहे हैं.
जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर रंजीत सिंह घुमन, ने कहा कि यह पंजाब को बदनाम करने की साजिश है, पंजाब ने हरित क्रांति लाई और दशकों से देश को अनाज दिया. जो गेहूं पंजाब में खाया और उगाया जा रहा है, वही पूरे देश में जाता है. अगर इसमें कोई दिक्कत होती, तो सबसे पहले पंजाब के लोगों पर असर दिखता. यह किसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था की रिसर्च नहीं है, बल्कि केवल एक व्यक्ति का दावा है.
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि यह पंजाब को बदनाम करने की कोशिश है, हमारे बाल लंबे और घने हैं. अगर ऐसा गेहूं होता, तो सबसे पहले हम प्रभावित होते. आज तक हमने ऐसी कोई बात नहीं सुनी.
दरअसल महाराष्ट्र के डॉक्टर बावस्कर ने जनवरी में बुलढाणा के 300 ग्रामीणों में अचानक गंजेपन की खबरें मिलने के बाद खुद अपने स्तर पर एक रिसर्च की थी, जिस पर उन्होंने करीब 92,000 रुपए खर्च किए. 25 और 26 जनवरी को उन्होंने प्रभावित गांवों से ब्लड, यूरिन और गेहूं के सैंपल इकट्ठा किए थे. हालांकि इस दावे को लेकर अब किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों ने डॉक्टर बावस्कर की थ्योरी को खारिज करते हुए कहा है कि यह आधारहीन और वैज्ञानिक प्रमाणों से परे है.