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'सुधीर सूरी को शहीद का दर्जा, एक सदस्य को नौकरी और अमृतपाल आरोपी', प्रशासन ने मानी शिवसेना नेता के परिवार की मांग

अमृतसर में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की शुक्रवार दोपहर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या के बाद से ही माहौल गर्म हो गया है. डीजीपी गौरव यादव ने लोगों से शांत रहने की अपील की थी. वहीं आक्रोशित शिवसेना कार्यकर्ताओं ने शनिवार को रेलवे ट्रैक जाम कर दिया. वहीं प्रशासन ने परिवार की मांगों को मानकर सूरी के अंतिम संस्कार के लिए तैयार कर लिया.

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हमलावर संदीप सिंह कट्टरपंथी है, खालिस्तानी समर्थक का प्रशंसक भी है (फाइल फोटो)
हमलावर संदीप सिंह कट्टरपंथी है, खालिस्तानी समर्थक का प्रशंसक भी है (फाइल फोटो)

शिवसेना नेता सुधीर सूरी का अंतिम संस्कार न करने पर अड़े परिवार से शनिवार को अमृतसर के कलेक्टर हरप्रीत सूडान और पुलिस कमिश्नर अरुण पाल सिंह ने मुलाकात की. इस दौरान परिवार ने उनसे मांग की कि हत्याकांड में अमृतपाल सिंह का नाम जांच में शामिल किया जाए. इसके अलावा एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने के अलावा सुधीर सूरी को शहीद का दर्जा देने की मांग की.

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आलाधिकारियों ने परिवार की सभी मांगों को मानने का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए सहमत हो गया. प्रशासन का कहना है कि शहीद का दर्जा देने के लिए एक कमेटी बनाकर विचार किया जाएगा, जिसके बाद प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा. डीसी ने मामले में निष्पक्ष जांच का भी आश्वासन दिया है. 

मालूम हो कि 4 नवंबर को शिवसेना नेता के बेटे ने सरकार से अपने पिता को शहीद का दर्ज देने की मांग की है. उसने यह भी कहा था कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती तो वह अपने पिता का अंतिम संस्कार नहीं करेगा.

शिवसेना समर्थकों ने रेलवे ट्रैक जाम किया

अमृतसर में शिवसेना समर्थकों ने शनिवार को नेता सुधीर सूरी की हत्या के विरोध में रेलवे ट्रैक जामकर दिया. उन्हें ट्रैक से हटाने के लिए भारी पुलिस ने लगाया गया. इस दौरान पुलिस और शिवसेना समर्थकों के बीच धक्का मुक्की भी हुई. दरअसल शिवसेना नेता की हत्या के बाद से ही माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.

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अमृतपाल सिंह को नजरबंद किया गया

पुलिस ने 'वारिस पंजाब दे' के मुखी अमृतपाल सिंह को मोगा के गांव सिंगावाला में नजरबंद कर दिया है. दरअसल अमृतपाल सिंह जालंधर के विशाल नगर में कीर्तन के लिए रवाना होने वाले थे, तभी पुलिस ने उन्हें गुरुद्वारा के पास नजरबंद कर दिया. वहीं अमृतपाल सिंह के फेसबुक पेज पर पोस्ट डालकर अपील की गई कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग वहां पहुंचे.

खालिस्तानी समर्थक माना जाता है अमृतपाल

अमृतपाल जरनैल सिंह भिंडरांवाले का समर्थक है. उसे खालिस्तानी समर्थक माना जाता है. सितंबर में अमृतपाल को संगठन का प्रमुख बनाया गया है. ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन को अभिनेता संदीप सिंह उर्फ दीप सिद्धू ने खड़ा किया था. दीप सिद्धू 26 जनवरी, 2021 को लालकिले पर हुए उपद्रव के मामले में प्रमुख आरोपी था. 

धरना देते समय मार दी गई थी गोली

अमृतसर में शिवसेना नेता सुधीर सूरी शु्क्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे गोपाल मंदिर के बाहर कूड़े में भगवानों की मूर्तियां मिलने के विरोध में मंदिर के बाहर धरने पर बैठे थे. तभी संदीप सिंह ने उन्हें गोली मारी दी थी.

अमृतपाल का समर्थक है हमलावर

पुलिस ने वारदात के कुछ देर बार ही हमलावर संदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया था. उसकी कार भी जब्त कर ली थी. आरोपी की कार में खालिस्तानियों का पोस्टर लगा हुआ है. इसके अलावा संदीप के इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उसके हालिया पोस्ट से पता चलता है कि वह कट्टरपंथी है.

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संदीप सिंह ने अपने अकाउंट से अमृतपाल सिंह के कई वीडियो पोस्ट किए और जिनमें खालिस्तान समर्थक नेता से मुलाकात का एक वीडियो भी शामिल है. संदीप अमृतसर का ही रहने वाला है. वह कपड़े का व्यापार करता है.

खालिस्तनियों की हिट लिस्ट में थे सुधीर सूरी

सुधीर सूरी अपने भड़काऊ भाषणों को लेकर चर्चा में रहते थे. पंजाब पुलिस ने इन बार उनके खिलाफ केस दर्ज किया था. उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. वह 2016 से खालिस्तानियों की हिट लिस्ट में थे.

अक्टूबर में सूरी की हत्या की प्लानिंग करने वाले पकड़े गए

23 अक्टूबर को पंजाब में एसटीएफ और अमृतसर पुलिस ने पिछले महीने 4 गैंगस्टर को गिरफ्तार किया था. पकड़े गए गैंगस्टर रिंदा और लिंडा के गुर्गे था. उन्होंने पूछताछ में बताया था कि वे शिवसेना नेता सुधीर सूरी पर हमले की साजिश रच रहे थे. उनकी रेकी भी कर चुके थे. आरोपियों ने यह भी बताया था कि उन्होंने सूरी पर दीवाली से पहले हमला करने की योजना बनाई थी. 

जान का था खतरा, सुरक्षा में तैनात थे 8 पुलिसकर्मी

इंटेलिजेंस को शिवसेना नेता पर हमले की इनपुट पहले ही मिल गए थे. इसके अलावा पंजाब के कई गैंगस्टरों से धमकी मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें हाल में ही सुरक्षा दी थी.

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हमले के वक्त पंजाब के आठ पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, इनमें 2 एसएचओ और एक एसीपी मौके पर मौजूद थे. इसके बाद भी हमलावर ने पुलिस के सामने उन्हें गोली मार दी. ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं.

 

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