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सांसद अमृतपाल सिंह ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, गणतंत्र दिवस समारोह और संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी

अमृतपाल सिंह ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि एक सांसद होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वह संसदीय सत्रों में भाग लें और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए विधायी चर्चाओं में हिस्सा लें. याचिका में कहा गया है कि जनहित, लोकतांत्रिक अधिकार और संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा के लिए यह भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है.

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सांसद अमृतपाल सिंह (फाइल फोटो)
सांसद अमृतपाल सिंह (फाइल फोटो)

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सांसद अमृतपाल सिंह ने एक याचिका दायर कर दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने और संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी है. याचिका में कहा गया है कि न्याय और समानता के हित में उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए.

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अमृतपाल सिंह ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि एक सांसद होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वह संसदीय सत्रों में भाग लें और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए विधायी चर्चाओं में हिस्सा लें. याचिका में कहा गया है कि जनहित, लोकतांत्रिक अधिकार और संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा के लिए यह भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है.

सांसद अमृतपाल सिंह वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत डिब्रूगढ़ जेल में बंद है. हाल ही में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल वारिस पंजाब दे नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी की शुरुआत की है.

अमृतपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने संसद में भाग लेने और गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए याचिका दायर की है. उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र के विकास और जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए संसद में हमारी उपस्थिति आवश्यक है.

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अनुमति देने से इनकार

अमृतपाल सिंह के अनुसार लोकसभा से उन्हें सत्र में शामिल होने के लिए पत्र मिला था, लेकिन बाद में खडूर साहिब के जिला मजिस्ट्रेट और लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया.

अमृतपाल की पार्टी में कितने सांसद?

अमृतपाल की नई-नवेली पार्टी में दो सांसद हैं. एक अमृतपाल खुद और दूसरा फरीदकोट से निर्दलीय सांसद सरबजीत सिंह खालसा. अमृतपाल और सरबजीत, दोनों की ही छवि खालिस्तान समर्थक नेता की है. इन दोनों की बतौर निर्दलीय जीत के बाद अब समर्थकों को लग रहा है कि वारिस पंजाब दे की विरासत के साथ ही अगर शिरोमणि अकाली दल से नाराज चल रहा पंथक वोटर साथ आ जाए तो सूबे की सियासत में मजबूत पकड़ बनाई जा सकती है. नई पार्टी के नाम में अकाली दल और वारिस पंजाब दे, दोनों का होना भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है.

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