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पंजाब: अब नवजोत सिंह सिद्धू ने उठाई फ्री बिजली की मांग, सरकार को दिए ये सुझाव

नवजोत सिंह सिद्धू ने लिखा है, 'आइए हम कांग्रेस हाईकमान के लोगों के हित में तैयार 18 प्वाइंट वाले एजेंडा से शुरू करें और पंजाब विधानसभा में नए विधान के माध्यम से बिना किसी निश्चित शुल्क के नेशनल पावर एक्सचेंज के अनुसार दरें तय कर बादल-हस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौतों से छुटकारा पाएं!'

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कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू. (फाइल फोटो)
कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बादल-हस्ताक्षरित समझौते को रद्द करने की दी सलाह
  • कहा - 300 यूनिट मुफ्त बिजली देना संभव
  • कांग्रेस हाईकमान द्वारा तैयार 18 प्वाइंट वाले एजेंडे का किया जिक्र

पंजाब (Punjab) में बिजली संकट (Power Cut) को लेकर सियासी बयानबाजियां जारी हैं. पंजाब की कांग्रेस सरकार विपक्ष के निशाने पर होने के साथ ही नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के बकाया बिल की भी बात सामने आई थी. अब सिद्धू ने बिजली संकट का रास्ता निकालते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने पंजाब सरकार को सुझाव दिया है.

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उन्होंने लिखा है, 'आइए हम कांग्रेस हाईकमान द्वारा लोगों के हित में तैयार 18 प्वाइंट वाले एजेंडा से शुरू करें और पंजाब विधानसभा में नए विधान के माध्यम से बिना किसी निश्चित शुल्क के नेशनल पावर एक्सचेंज के अनुसार दरें तय कर बादल-हस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौतों से छुटकारा पाएं!''

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा है'' पंजाब सरकार पहले से ही नौ हजार करोड़ की सब्सिडी देती है लेकिन हमें घरेलू और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को 10-12 रुपये प्रति यूनिट सरचार्ज के बजाय 3-5 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देनी चाहिए. साथ ही 24 घंटे की सप्लाई, कोई पावर कट नहीं और 300 यूनिट तक फ्री में बिजली दी जानी चाहिए. यह निश्चित रूप से प्राप्त करने योग्य है.''

सिद्धू ने पहले भी दिया था सुझाव

इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया था कि पंजाब किसी अन्य राज्य से अधिक पैसे देकर बिजली खरीदता है. सिद्धू ने कहा कि बादल सरकार ने तीन कंपनियों से बिजली खरीद की बात तय की थी, 2020 तक हम इन्हीं से बिजली लेते आ रहे थे. लेकिन अब पंजाब को नेशनल ग्रिड से बिजली लेनी चाहिए क्योंकि यहां पर सस्ती बिजली मिलेगी.

मायावती ने साधा था निशाना

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इससे पहले पंजाब में बिजली संकट को लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने कहा था, ''पंजाब में बिजली के गंभीर संकट से आमजन-जीवन, उद्योग-धंधे व खेती-किसानी आदि बुरी तरह से प्रभावित, जो यह साबित करता है कि वहाँ की कांग्रेस सरकार आपसी गुटबाजी, खींचतान व टकराव आदि में उलझकर जनहित व जनकल्याण की ज़िम्मेदारी को तिलांजलि दे चुकी है, जिसका जनता को संज्ञान लेना ज़रूरी.''

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