पंजाब के फरीदकोट में हुए बेअदबी मामले में आरोपी डेरा प्रेमी प्रदीप सिंह की अज्ञात बाइक सवारों ने गोली मारकर हत्या कर दी. गोलीबारी में एक गनमैन भी घायल हो गया है. सुबह जब प्रदीप सिंह अपनी दुकान खोलने के लिए जा रहा था तभी दो बाइक सवार बदमाशों ने इस वारदात को अंजाम दिया. इसके साथ ही गनमैन को गंभीर हालत में मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
फरीदकोट के बरगाड़ी में बेअदबी का ये मामला 12 अक्टूबर 2015 का है. इस मामले में पहले पंजाब सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी जांच कर रही थी. उसके बाद इस केस को सीबीआई को सौंप दिया गया था.
किसी को पंजाब की शांति भंग करने की इजाजत नहीं: मान
इस मामले में पंजाब के सीएम भगवंत मान ने ट्वीट किया है. उन्होंने कहा है कि किसी को भी पंजाब की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. पंजाब सीएम ने लिखा, "पंजाब एक शांतिप्रिय राज्य है जहां लोगों का आपसी भाईचारा बहुत मजबूत है. किसी को भी पंजाब की शांति भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. राज्य की शांति बनाए रखने के लिए नागरिक और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए हैं."
क्या बोले फरीदकोट के पुलिस अधिकारी?
फरीदकोट के बरगाड़ी बेअदबी मामले में डेरी प्रेमी की हत्या को लेकर आईजी प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इस घटना में एक शख्स की मौत हो गई और तीन लोग घायल हुए हैं. हम इस घटना का सीसीटीवी फुटेज जुटाने में लगे हैं. हम आरोपियों को पकड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सही-सही पता चलेगा.
क्या है बेअदबी का मतलब?
बेअदबी का शाब्दिक अर्थ है अपमान. जहां तक सिख धर्म की बात है, तो मूल रूप से तीन बातों को बेअदबी कहा जा सकता है.
- पहली है गुरु ग्रंथ साहिब या सिखों के पवित्र प्रतीकों का अपमान किया जाना
- दूसरी, गुरु ग्रंथ साहिब के रखने के स्थान को नुकसान पहुंचाना भी बेअदबी है
- इसके अलावा सिख गुरुओं के बताए रास्ते को या इतिहास को बदलने की कोशिश करना भी बेअदबी है.
बेअदबी में अभी क्या है कानून, क्या है सजा का प्रावधान
बेअदबी के मामले IPC की धारा 295 और 295A के तहत दर्ज होते हैं. गुरुद्वारे या वहां की पवित्र वस्तु को नुकसान पहुंचाने पर 2 साल की सजा हो सकती है. धार्मिक भावनाएं भड़काने के मकसद से की गई बेअदबी पर 3 साल की सजा है.
साल 2018 में पंजाब ने बेअदबी के मसलों पर कानून में संशोधन करके धारा 295AA जोड़ने की बात आगे बढ़ाई थी. इसमें गुरू ग्रंथ साहिब, श्रीमद्भगवतगीता, पवित्र कुरान और पवित्र बाइबल की बेअदबी पर आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया था. हालांकि, इस प्रस्ताव पर केंद्र ने कोई एक्शन नहीं लिया. वहीं, सिख समुदाय ये मांग करता रहा है कि बेअदबी के मामले में 10 से 20 साल की सजा होनी चाहिए.