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पंजाब BJP चीफ ने की इस्तीफे की पेशकश, जानें क्यों पद छोड़ना चाहते हैं सुनील जाखड़

बीजेपी सूत्रों ने खुलासा किया है कि उन्होंने वास्तव में इस्तीफा देने की पेशकश की है, लेकिन आधिकारिक कागजी कार्रवाई अभी तक प्रस्तुत नहीं की गई है. वहीं बीजेपी महासचिव अनिल सरीन ने आजतक से कहा, "सुनील जाखड़ ने इस्तीफा नहीं दिया है, हालांकि ऐसी अफवाहें हैं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. वह अभी भी पार्टी के साथ हैं और हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं."

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पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इस्तीफे की पेशकश की है (फाइल फोटो)
पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इस्तीफे की पेशकश की है (फाइल फोटो)

पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ के संभावित इस्तीफे को लेकर अनिश्चितता के बीच पार्टी सूत्रों ने खुलासा किया है कि उन्होंने वास्तव में इस्तीफा देने की पेशकश की है, लेकिन आधिकारिक कागजी कार्रवाई अभी तक प्रस्तुत नहीं की गई है. वहीं बीजेपी महासचिव अनिल सरीन ने आजतक से कहा, "सुनील जाखड़ ने इस्तीफा नहीं दिया है, हालांकि ऐसी अफवाहें हैं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. वह अभी भी पार्टी के साथ हैं और हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं."

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बीजेपी सूत्रों का कहना है कि जाखड़ ने दो बार इस्तीफा देने की पेशकश की है. एक बार जुलाई में जालंधर उपचुनाव के बाद और दूसरी बार अब.

क्यों बीजेपी अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते जाखड़?

सुनील जाखड़ का पंजाब बीजेपी प्रमुख के रूप में पद छोड़ने का फैसला जटिल है. पार्टी के आलाकमान और पंजाब यूनिट के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के साथ उनके असंतोष ने एक जटिल और तीव्र राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को चंडीगढ़ में हुई एक अहम बैठक पार्टी अध्यक्ष जाखड़ के बिना ही संपन्न हो गई. नाराज सुनील जाखड़ ने कथित तौर पर भविष्य की किसी भी बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया. हालांकि, पार्टी महासचिव अशोक सरीन ने इससे इनकार किया और स्पष्ट किया कि पार्टी अध्यक्ष को सभी कार्यालय बैठकों में भाग लेने की जरूरत नहीं है. 

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पार्टी सूत्रों का कहना है कि जाखड़ कुछ संगठन मंत्रियों की अपमानजनक कार्यप्रणाली से भी खुश नहीं हैं, जो कथित तौर पर एक प्रदेश अध्यक्ष के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. 

चंडीगढ़ स्थित एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है, "जाखड़ काफी समय से चुप थे और लोकसभा चुनाव से पहले भी उन्हें भरोसा नहीं था. पंजाब में बीजेपी की छवि किसानों के हितैषी नहीं है. उन्होंने अकाली दल को रोकने का प्रयास किया. वह खुश नहीं थे, क्योंकि उन्हें खुली छूट नहीं दी गई."

क्या पंजाब में सुनील जाखड़ की कमजोरी है पगड़ी न पहनना?

जानकारों की मानें तो सुनील जाखड़ भले ही हिंदू और जाट नेता हों, लेकिन पंजाब की राजनीति में पगड़ी न पहनना उन्हें महंगा पड़ गया. उन्हें कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसने उन्हें सिख न होने के कारण मुख्यमंत्री पद के लिए नहीं चुना. वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने खुलेआम कहा था कि जाखड़ पंजाब के मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि वे सिख नहीं हैं. दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज करके उनके कनिष्ठों को शीर्ष पद के लिए चुना.

हालांकि भाजपा ने उन्हें राज्य पार्टी अध्यक्ष बनाया, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हें नहीं चुना, जैसा कि चुनाव हार चुके रवनीत सिंह बिट्टू के मामले में हुआ. इससे यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी की प्राथमिकताएं कहां हैं. दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी ने अपनी राज्य इकाई में हिंदुओं से ज्यादा सिख कांग्रेस नेताओं को शामिल किया. एक बार कहा गया था कि पंजाब में बीजेपी पार्टी यूनिट कांग्रेस की बी-टीम है.

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बीजेपी ने सुनील जाखड़ के कम समय में किए गए योगदान को नजरअंदाज किया है. पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भले ही कोई सीट नहीं जीती हो, लेकिन उसका वोट शेयर 2019 में 9% से बढ़कर 2024 में 18% हो गया.

सुनील जाखड़ के पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश ने राज्य यूनिट को असमंजस में डाल दिया है, क्योंकि 15 अक्टूबर को पंचायत चुनाव होने हैं. जाखड़ 19 मई, 2022 को बीजेपी में शामिल हुए. जाखड़ और कैप्टन अमरिंदर को दिसंबर 2022 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में चुना गया. जुलाई 2023 में जाखड़ को राज्य पार्टी प्रमुख के रूप में पदोन्नत किया गया.

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