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पंजाब विवाद का होगा समाधान! अब कैप्टन अमरिंदर दिल्ली तलब, सोनिया मंगलवार को करेंगी मुलाकात

विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस चाहती है कि जल्द से जल्द पार्टी में जारी गुटबाजी खत्म हो. पार्टी की नई रणनीति तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मंगलवार को मुलाकात कर सकते हैं.

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो-PTI)
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंजाब कांग्रेस में अब तक कलह खत्म नहीं
  • सोनिया गांधी से मिलेंगे सीएम अमरिंदर
  • कलह खत्म करने पर बनेगी रणनीति

पंजाब कांग्रेस में जारी कलह खत्म होती नजर नहीं आ रही है. राज्य में कांग्रेस के नेताओं की गुटबाजी आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए मुसीबत बन सकती है. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में जारी घमासान के बीच सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह दिल्ली तलब किए गए हैं. कैप्टन अमरिंदर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मंगलवार को मुलाकात करेंगे. 

सीएम ऑफिस के सूत्रों के मुताबिक दिल्ली दौरे के दौरान अब कैप्टन अमरिंदर सिंह की मुलाकात सोनिया गांधी और राहुल गांधी से हो सकती है. कांग्रेस आलाकमान ने नवजोत सिंह सिद्धू को एडजस्ट करने और अन्य नाराज कांग्रेस नेताओं के मसले को सुलझाने के लिए मसौदा तैयार किया है, उस पर अंतिम मुहर कैप्टन अमरिंदर सिंह की राय लेने के बाद लगाई जा सकती है.

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माना जा रहा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जारी इस कलह को खत्म करने के लिए कोई रास्ता निकालने के बाद ही कैप्टन वापस आएंगे. बैठक में ऐसा फॉर्मुला तैयार किया जाएगा, जिससे कांग्रेस नेताओं की आपसी फूट खत्म हो और अंतिम मसौदे पर बात बन सके. पार्टी के लिए अभी सबसे बड़ा सिरदर्द यह है कि किस तरह से नवजोत सिंह सिद्धू और उनके खेमे की नाराजगी दूर की जाए. 

कैप्टन सरकार से नवजोत सिंह सिद्धू की बगावत खत्म करने के लिए कांग्रेस पार्टी जल्द ऐलान कर सकती है. माना जा रहा है कि चुनावों से पहले पार्टी में जारी विरोध को खत्म करने के लिए पार्टी बड़े कदम उठा सकती है. स्टेट यूनिट में जारी कलह की वजह से कांग्रेस पार्टी के लिए लगातार मुश्किलें पैदा हो रही हैं. कैप्टन सरकार का ध्यान राज्य से ज्यादा पार्टी की कलह पर है.

पंजाब कांग्रेस में बड़ा सियासी उलटफेर, नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ साथ आने को तैयार कैप्टन अमरिंदर और बाजवा 

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पार्टी को भारी न पड़ जाएं बगावती तेवर!

दरअसल नवजोत सिंह सिद्धू की बगावत पार्टी को चुनावों में भारी पड़ सकती है. हाल ही में पावर कट को लेकर सिद्धू कैप्टन सरकार के खिलाफ हमलावर हो गए थे. उन्होंने पंजाब सरकार को कई सुझाव भी दिए थे. सिद्धू ने बिजली की दरों को लेकर भी सवाल खड़े किए थे.

उन्होंने कहा था कि पंजाब सरकार पहले से ही नौ हजार करोड़ की सब्सिडी देती है लेकिन हमें घरेलू और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को 10-12 रुपये प्रति यूनिट चार्ज सरचार्ज के बजाय 3 से 5 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देनी चाहिए. साथ ही 24 घंटे की सप्लाई भी मिलनी चाहिए. 300 यूनिट तक फ्री बिजली भी देनी चाहिए. ऐसे सवालों से विपक्षी पार्टियां भी सिद्धू के बयान का हवाला देकर कांग्रेस सरकार को घेर सकती हैं.

बागी नेताओं में समझौता

सिद्धू की अटैकिंग पॉलिसी से कांग्रेस पार्टी दो गुटों में बंट गई  है. सिद्धू के समर्थन वाले विधायक पहले ही कैप्टन सरकार से नाराज हैं, वहीं कई अन्य सीनियर नेता भी कैप्टन सरकार से नाराज चल रहे हैं. कैप्टन अमरिंदर के खिलाफ प्रताप सिंह बाजवा भी ताल ठोक चुके हैं लेकिन सिद्धू की वजह से कैप्टन और उनमें समझौता होता भी नजर आ रहा है.

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क्यों अलग-थलग पड़ेंगे सिद्धू?

 सिद्धू अब पंजाब कांग्रेस में अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं. पार्टी आलाकमान से उनकी नजदीकियों के भले ही चर्चे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर कैप्टन के विरोधी गुट भी अमरिंदर से हाथ मिलाते नजर आ रहे हैं. हाल ही में कैप्टन के धुर विरोधी प्रताप सिंह बाजवा और अन्य वरिष्ठ विधायकों के बीच समझौते की स्थिति बनी है.

 

वरिष्ठ नेताओं की मेहनत से पंजाब में कांग्रेस दोबारा खड़ी हुई है, ऐसे में कथित तौर पर ही सही आलाकमान का नवजोत सिंह सिद्धू को अहमियत देना पार्टी नेतृत्व को खल रहा है. सिद्धू आज कांग्रेसी भले ही हो गए हों लेकिन अतीत उनका भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़ा है. ऐसे में अब सिद्धू को रोकने के लिए कैप्टन और बाजवा एक मंच पर भी आ सकते हैं. ऐसे में नवजोत सिंह सिद्धू का पार्टी में अलग-थलग पड़ना तय है. 
 

 

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