कृषि अध्यादेशों पर विवाद बढ़ता जा रहा है. एक तरफ किसान सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के इस कदम का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दल भी किसानों के समर्थन में आ गए हैं. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इस मसले पर राज्यपाल से मिलने वाले हैं.
कैप्टन अमरिंदर सिंह बुधवार को एक 11 सदस्यीय डेलिगेशन के साथ पंजाब के राज्यपाल से मिलेंगे और कृषि अध्यादेशों के खिलाफ अपना पक्ष बताएंगे और ज्ञापन सौंपेंगे. इस डेलिगेशन में पंजाब कांग्रेस कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी शामिल रहेंगे.
राज्यपाल से मिलने का यह निर्णय तब लिया गया है जब सोमवार को सरकार ने तीन अध्यादेश बिल के रूप में संसद में पेश कर दिए. सोमवार को ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस दिशा में आगे न बढ़ने की अपील की. कैप्टन अमरिंदर ने इन अध्यादेशों को 'किसान विरोधी अध्यादेश' बताया है. साथ ही उन्होंने किसानों के लिए एमएसपी को जरूरी बताया है.
पंजाब सरकार ने हमेशा किया विरोध- कैप्टन
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ये भी कहा कि हमारी सरकार लगातार तथाकथित कृषि सुधारों का विरोध कर रही है. हमने केंद्र के ऐसे किसी भी कदम का समर्थन नहीं किया. यहां तक कि एक बार भी अध्यादेश पर उच्च स्तरीय कमेटी की मीटिंग में चर्चा नहीं की गई. बता दें कि इस कमेटी में पंजाब भी शामिल था.
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रावसाहिब पाटिल दानवे ने भी संसद में ये मुद्दा उठाया और दावा किया कि सभी सदस्य राज्यों के साथ चर्चा के बाद ही उच्च स्तरीय कमेटी ने अध्यादेश पर फैसला किया है.
इस दावे पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पलटवार किया और बताया कि जुलाई 2019 में केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई इस कमेटी से पहले पंजाब को बाहर रखा गया था, बाद में अगस्त महीने में पंजाब को इसका हिस्सा बनाया गया. तब तक कमेटी की पहली मीटिंग हो चुकी थी. दूसरी मीटिंग 16 अगस्त 2019 को हुई जिसमें पंजाब के वित्त मंत्री ने हिस्सा लिया. वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के मुताबिक, इस मीटिंग में कृषि के जुड़े कुछ मसलों पर चर्चा हुई, लेकिन अध्यादेश के प्रावधानों पर कोई बात नहीं की गई. इसके बाद 3 सितंबर 2019 को जो मीटिंग हुई उसमें पंजाब सरकार ने APMC एक्ट के खिलाफ किसी भी कदम का विरोध किया.
कैप्टन अमरिंदर ने बताया कि इसके बाद ड्राफ्ट रिपोर्ट हमारे पास आई, जिस पर हमने स्पष्ट कर दिया कि किसानों के हक के खिलाफ किसी भी कदम का विरोध किया और इसके बाद कोई मीटिंग नहीं हुई.
संसद में विरोध करेगा अकाली दल
एक तरफ जहां कांग्रेस और पंजाब सरकार किसानों के साथ है, वहीं पंजाब में विपक्षी अकाली दल भी इस मसले पर केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ी है. एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद अकाली दल कृषि अध्यादेशों से जुड़े बिल पर सरकार के खिलाफ वोटिंग का मन बना रही है.