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पंजाब का अन्नदाता एक बार फिर प्रदर्शन के रास्ते पर है. राज्य के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन उग्राहां की ओर से पंजाब के 19 जिलों में 6 फरवरी से 10 फरवरी तक जिला हेडक्वार्टर पर पांच दिवसीय धरने शुरू कर दिए गए हैं, जो दिन रात चलेंगे. किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में रात के रहने और खाने का सामान लेकर पहुंचे हैं.
किसानों का यह धरना पंजाब सरकार के खिलाफ चल रहा है. वे नई खेती नीति लागू करवाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके तहत उनकी फसलों के दाम स्वामी नाथन की रिपोर्ट के अनुसार दिए जाने, किसानों को 10,000 रुपये प्रति महीना पेंशन और कर्ज माफी की अहम मांग शामिल हैं.
पंजाब के मुख्यमंत्री के जिले में भी किसानों का धरना शुरू हो चुका है. वहां किसान नेता जगतार सिंह और जनक सिंह ने बताया कि हम खेती नीति को लागू करवाने के लिए बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं. इसकी तैयारी हम कई दिनों से कर रहे थे. दरअसल, हमारे संगठन के पंजाब अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री की मीटिंग हुई थी.
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पंजाब के किसानों की ये हैं प्रमुख मांगे
इसमें हमने उनसे कहा था कि किसानों के लिए सरकार आगे आए. खेती की नीति लागू करने की सरकार ने सहमति दी थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ. खेती नीति में कई चीजें थीं, जिसमें पहले तो डॉक्टर स्वामीनाथन की रिपोर्ट के अनुसार हमारी फसलों के दाम मिलें. दूसरी बड़ी मांग, पंजाब में किसानों और मजदूरों का पूर्ण कर्ज माफ किया.
तीसरी मांग, पंजाब सरकार की ओर से जो बातें सप्ताह में आने से पहले किए गए थे और सभी को लागू किया जाए. इसमें रोजगार देना, महिलाओं को हजार रुपए प्रति महीना देना, और किसान को 10,000 प्यार प्रति महीना पेंशन स्कीम शुरू करना, फसल की बीमा योजना शुरू करना शामिल था. अब इन्हीं मांगों को लागू करवाने के लिए किसानों ने धरना देना शुरू कर दिया है.
किसान नेता जनक सिंह ने बताया कि वह अपना पूरा सामान अपने साथ लेकर आए हैं. ट्रैक्टर ट्राली में रात को रहने के लिए और खाने-पीने का पूरा राशन है. पांच दिन किसान लगातार दिन-रात यही रहेंगे और 10 फरवरी को जब धरना समाप्त होगा, तब कोई बड़ा फैसला होगा. अगर सरकार ने हमारी बातें मानीं, तो ठीक है. नहीं मानीं, तो हम चंडीगढ़ के लिए मार्च की तैयारी का ऐलान कर सकते हैं.
हरियाणा, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड में यूनियन की पकड़ मजबूत
आपको बता दें कि भारतीय किसान यूनियन उग्राहां पंजाब का सबसे बड़ा किसान संगठन है. यह दिल्ली आंदोलन के बाद पंजाब के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड में अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है. अब यह संगठन पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है.
वहीं, दूसरी ओर पंजाब के कई गैर-राजनीतिक किसान संगठन 13 फरवरी को दिल्ली आंदोलन से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर दिल्ली का रुख करने की तैयारी में है. इसे देखते हुए कह सकते हैं ऐसे में पंजाब और केंद्र सरकार की मुश्किलें किस एक बार फिर बढ़ने जा रहे हैं.