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पंजाब विधानसभा चुनाव: बसपा के साथ अकाली दल के गठबंधन का क्या है सियासी गणित?

इस गठबंधन के माध्यम से अकाली दल की नजर पंजाब के करीब 33% दलित वोट बैंक पर है और बहुजन समाज पार्टी को ज्यादातर वो सीटें दी जा रही हैं जहां पर दलित मतदाता हार और जीत का फैसला करते हैं.

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बसपा संग अकाली दल का गठबंधन
बसपा संग अकाली दल का गठबंधन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अकाली-बसपा का 25 साल पुराना इतिहास
  • गठबंधन के जरिए सत्ता में आने की कवायद
  • कांग्रेस-बीजेपी ने कसा तंज

पंजाब में विधानसभा चुनाव में अब चंद ही महीने बचे हैं और इसी वजह से तमाम राजनीतिक पार्टियों ने सरगर्मियां बढ़ा दी हैं. ताजा घटनाक्रम में अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ पंजाब विधानसभा चुनाव में गठबंधन का ऐलान कर दिया और दोनों ही पार्टियों ने गठबंधन की बड़ी जीत का दावा भी ठोक दिया. गठबंधन के फार्मूले के तहत पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 20 सीटों पर बहुजन समाज पार्टी चुनाव लड़ेगी जबकि बाकी 97 सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ेगा.

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अकाली-बसपा का 25 साल पुराना इतिहास

इस गठबंधन के माध्यम से अकाली दल की नजर पंजाब के करीब 33% बड़े दलित वोट बैंक पर है और बहुजन समाज पार्टी को ज्यादातर वो सीटें दी जा रही हैं जहां पर दलित मतदाता हार और जीत का फैसला करते हैं. बीएसपी को दी गई सीटों में से मुख्य रूप से करतारपुर, जालंधर वेस्ट, जालंधर नार्थ, फगवाड़ा, होशियारपुर शहरी, टांडा, दसूहा, चमकौर साहिब, लुधियाना नार्थ विधानसभा सीटें शामिल हैं. इससे पहले अकाली दल और बीएसपी 1996 लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन कर चुके हैं और अब 25 सालों बाद फिर से साथ आ रहे हैं. 1996 लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन ने पंजाब की 13 में से 11 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. बीएसपी चुनाव में सभी तीन सीटों और अकाली दल 10 में से 8 सीटों पर जीती थी.

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गठबंधन के सहारे जीत पर जोर

आज तक से खास बातचीत के दौरान अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने दावा किया कि जल्द ही अकाली दल तमाम रीजनल पार्टियों को एक मंच पर लाकर केंद्रीय स्तर पर भी मोर्चा खड़ा करने की तैयारी में है और इसकी शुरुआत बीएसपी के साथ गठबंधन करके की गई है. वहीं गठबंधन के ऐलान के लिए चंडीगढ़ पहुंचे बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने भी दावा किया कि अकाली-बीएसपी गठबंधन जल्द ही सीटों का ऐलान भी कर देगा और आने वाले विधानसभा चुनाव में गठबंधन की ही सरकार बनेगी.

वही इस गठबंधन को लेकर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई. कांग्रेस के सांसद जसवीर डिंपा ने अकाली दल पर तंज कसते हुए कहा कि ये गठबंधन सिर्फ डूबते को तिनके का सहारा है और अकाली दल पंजाब में पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उन्हें लगता है कि वो बीएसपी का सहारा लेकर अपनी नैया पार लगा सकते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला.

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बीजपी ने इस गठबंधन पर क्या बोला?

गठबंधन पर पूर्व कैबिनेट मंत्री और बीजेपी नेता मनोरंजन कालिया ने कहा कि ये गठबंधन कामयाब नहीं होगा और बसपा को 20 सीटें दी गई हैं लेकिन मुश्किल है कि अकाली दल इन सीटों पर अपना वोट डलवा पाएगा. उन्होंने कहा कि अकाली दल एक मौकापरस्त पार्टी है जो पहले भाजपा के साथ गठजोड़ कर चुनाव लड़ती रही और अब जब भाजपा से साथ छूट गया है तो बहुजन समाज पार्टी को अपना हथियार बना रही है.

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कुल मिलाकर जिस तरह से अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन का ऐलान किया है उससे पंजाब की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है और इन दोनों ही पार्टियों के गठबंधन को देखते हुए अन्य तमाम राजनीतिक पार्टियां भी इलेक्शन मोड में आ गई हैं.

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