पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी में कोई पंजाब को लेकर गंभीर नहीं है और कांग्रेस उपाध्यक्ष जिस तरह पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, उनका मोहभंग हो गया है.
एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में अमरिंदर सिंह ने कहा, 'हम पंजाब में समस्याओं से जूझ रहे हैं. पंजाब मेरा घर है. राहुल गांधी को पंजाब में नहीं रहना, लेकिन मुझे रहना है. मेरे परिवार और आगे की पीढ़ी को यही रहना है. मैं नहीं जानता देश के और हिस्सो में क्या हो रहा है, लेकिन पंजाब को जिस तरह से चलाया जा रहा है मेरा मोहभंग हो गया है.'
पूर्व सीएम ने आगे कहा कि उनकी पार्टी में पंजाब को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है. इस ओर काफी समय भी दिया जा चुका है. बाजवा को एक मौका दिया गया, लेकिन अगर वह आदमी असफल हुआ है तो आपने उन्हें वहां क्यों रखा हुआ है? सिंह ने आगे कहा, 'यह काम करने का तरीका नहीं है. श्रीमति गांधी उन्हें काफी समय पहले वहां से हटा देतीं, लेकिन अब राहुल गांधी को निर्णय करना होगा कि वह आदमी असफल हो गया है और उसे हटाना जरूरी है.'
'दलित के घर खाना खाने से समाधान नहीं होता'
अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'राहुल युवा हैं. उनकी अपनी सोच है, लेकिन उनको यह समझना होगा कि भारत एक विशाल देश है. आप भारत को बदल नहीं सकते. बंगाल, असम, केरल हर जगह की अपनी समस्याएं हैं. आप अलग तरीके से एक नया भारत बनाकर भारत को बदल नहीं सकते. कहीं जाकर बैठ जाने और दलित के घर खाना खाने से समस्या का समाधान नहीं होता. यह सिर्फ नाटक है.'
वास्तविकता से रूबरू होने की जरूरत
राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के सवाल पर अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह सिर्फ पंजाब के बारे में कह सकते हैं और राज्य में सबकुछ ठीक नहीं है. सिंह ने कहा, 'आपको उन लोगों से जुड़ने की जरूरत है जो पंजाब की समस्याओं को जानते हैं. आप ऐसे लोगों को अलग नहीं रख सकते. राहुल गांधी राष्ट्रीय समस्याओं का आधुनिक तरीके से समाधान करना चाहते हैं. जबकि ऐसा नहीं हो सकता. आपके समाज में आदिवासी भी रहते हैं, जो जामुन और चमगादड़ खाते हैं. यह वास्तविकता है और उन्हें सच्चाई से रूबरू होने की जरूरत है.'
अमरिंदर सिंह ने कहा कि लोग उनसे कांग्रेस छोड़ने को कह रहे हैं. लेकिन इसके लिए पार्टी नेतृत्व को भी सोचने की जरूरत है कि वह पंजाब में समस्याओं से पार पाना चाहती है या नहीं. अगर ऐसा नहीं होता है तो मुझे दूसरे विकल्पों की ओर देखना होगा.