भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी बुधवार को राजस्थान के जालौर जिले के एक गांव में पहुंचे. धोनी को यहां पर एक स्कूल का उद्घाटन करना था लेकिन फीता काटते समय धोनी को जोर का धक्का लगा, जिससे रिबन टूट गया. इसके बाद सुरक्षा कारणों से धोनी को तुरंत लौटाना पड़ा. इस दौरान आयोजकों और पुलिस ने भीड़ को काबू में करने की कोशिश की लेकिन लोग मानने के लिए तैयार नहीं हुए.
फोटो और रिपोर्ट: नरेश सरनाऊ
धोनी को बीच में ही कार्यक्रम छोड़ना पड़ा. भीड़ ने टेंट को तोड़ा और धोनी के साथ सेल्फी खींचने की कोशिश करने लगी. इस दौरान पुलिस ने लोगों को रोकने का प्रयास किया. पूरे कार्यक्रम में भगदड़ मच गई और पुलिस को प्रशंसकों पर लाठीचार्ज करना पड़ा. इसी बीच आयोजक धोनी को निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले गए. धोनी जब मंच पर पहुंचे तो उस वक्त मंच पर पहले से ही राज्य मंत्री सुखराम बिश्नोई और सांसद देवजी एम पटेल मौजूद थे. प्रशंसक धोनी के मंच पर आते ही उनके नजदीक पहुंच गए. उस वक्त पुलिसकर्मी भीड़ को हटाने के बजाय धोनी संग सेल्फी ले रहे थे.
पुलिस ने लोगों पर इस कदर लाठियां बरसाईं की पूरा पंडाल कुछ ही देर पूरी तरह से खाली हो गया. महेंद्र सिंह धोनी कार्यक्रम को बीच में छोड़कर अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए. जाखल गांव में जैन समाज ने दो करोड़ रुपए की लागत से संघवी तीजाबेन मिश्रीमल जी कटारिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का निर्माण कराया. इसके उद्घाटन के लिए धोनी को बुलाया गया था.
जालौर जिले में पहली बार किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे धोनी की एक झलक देखने के लिए भारी संख्या में उनके फैंस पहुंचे. धोनी को देखने के लिए लोगों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा था. कार्यक्रम के चारों तरफ टेंट लगे थे. जिसके कारण लोग धोनी को देख नहीं पा रहे थे. इस दौरान भारी भीड़ ने टेंट उखाड़ दिए और हर तरफ अफरा तफरी का माहौल बन गया.
पुलिस को सख्ती दिखाते हुए लोगों को मौके से खदेड़ना पड़ा. इस मामले में प्रशंसकों का कहना है कि हम लोग दूर दूर से धोनी को देखने आए थे. हम पर लाठी बरसाने के बजाए सही व्यवस्था की गई होती तो यह घटना नहीं घटती. लोग गुजरात और जालौर के पड़ोसी जिलों से धोनी को देखने को आए थे. वहीं एसपी श्याम सिंह का इस मामले में कहना है कि हमें जानकारी नहीं थी कि धोनी यहां आ रहे हैं. अगर आयोजकों की तरफ से बताया गया होता तो उचित व्यवस्था कर दी जाती.