मध्य प्रदेश के छतरपुर में मजदूर पति के कर्ज से परेशान होकर 60 वर्षीय महिला ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी. मृतक के बेटे ने बैंक वालों पर प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए कहा कि बैंक की तरफ से लगातार पैसे की मांग की जा रही थी और लॉकडाउन होने की वजह से मजदूरी का काम नहीं मिल रहा था. इसकी वजह से उनके पिता पैसे चुकाने में सक्षम नहीं थे. इसी डिप्रेशन और दबाव के चलते मां ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली.
ये घटना जिले के अलीपुरा थाना क्षेत्र के बड़ागांव की है. जहां की रहने वाली 60 वर्षीय महिला जानकी कुशवाहा अपने पति हरदयाल कुशवाहा के बैंक कर्ज से परेशान थी. बैंक के दबाव से परेशान होकर 16 सितंबर को जानकी ने जहरीला पदार्थ खा लिया. इसके बाद जानकी को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां गुरूवार को मिशन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई.
मृतक महिला के पुत्र का कहना है कि बैंक ऑफ बड़ौदा से 80 हजार और सहकारिता बैंक से 25 हजार का लोन था जिसको लेकर लगातार बैंक से पैसे चुकाने के लिए उनके पास फोन आ रहा था. उनके पास कर्ज चुकाने के लिए पैसे नहीं थे जिससे मानसिक रूप से परेशान होकर मेरी मां ने जहरीला पदार्थ खा लिया.
मृतक महिला के बेटे ग्यासी कुशवाहा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से ही उनका परिवार बुरी तरह से परेशान था. ना ही उन्हें कोई काम मिल रहा था और ना ही शासकीय योजनाओं का लाभ मिल रहा था. यहां तक कि उनके पास गरीबी रेखा का राशन कार्ड तक नहीं था जिसके चलते वह खाद्यान्न तक के लिए परेशान होना पड़ता था. इन्हीं सब बातों से परेशान होकर उसकी मां ने यह कदम उठाया है.
दूसरी तरफ एडिशनल एसपी समीर सौरभ का कहना है कि एक महिला की मृत्यु को मेरे संज्ञान में लाया गया है. जिसमें 60 वर्षीय बड़ा गांव निवासी महिला ने 16 तारीख को जहरीला पदर्थ खा लिया था जिसकी गुरुवार जिला अस्पताल में मृत्यु हो गई.
एडिशनल एसपी ने आगे कहा कि वीडियो के मुताबिक उसका बेटा यह आरोप लगा रहा है कि पिता के ऊपर बैंक वालों का करीब 75 से 80 हजार रुपये कर्जा था और उसने कॉपरेटिव एवं बैंक ऑफ बड़ौदा का नाम लिया है. बैंक वाले लगातार परेशान कर रहे थे और लॉकडाउन होने के कारण देहाड़ी का काम नहीं मिल रहा था और बैंक वाले परेशान कर रहे थे. अब इस मामले की जांच कराई जा रही है. अगर बैंक दोषी होगा तो कार्रवाई की जाएगी.