आज भले ही हम 21वीं सदी में रहे रहे हैं, संचार के नये-नये साधनों ने ग्लोबलाइजेशन को नया आयाम दिया है और हर चीज को विज्ञान की कसौटी पर तौलकर देखा जाता है. बावजूद इसके गांव, देहात में लोग अंधविश्वास में जी रहे हैं. राजस्थान के धौलपुर जिले के सेवा का पुरा गांव में 35 साल का युवक को जब सांप ने काटा तो ग्रामीण उसका इलाज डॉक्टर के बजाए तंत्र-मंत्र झाड़-फूंक करने वालों से कराने लगे.
(इनपुट: उमेश मिश्रा)
दरअसल पूरा मामला धौलपुर जिले के गांव सेवा का पुरा के रहने वाले लाखन सिंह मध्य प्रदेश के ग्वालियर की जय दुर्गे स्टोन में मुनीम का काम करता था. सुबह रामअवतार खाना खाकर हैंडपंप पर पानी पीने गया था. लेकिन इसी दौरान हैंडपंप के पास जहरीले सांप ने उसे काट लिया. लाखन सिंह ने साथियों को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है. साथियों ने जल्दी से युवक को ग्वालियर के अस्पताल में भर्ती कराया.
परिजनों का कहना है कि कोरोना का हवाला देकर अस्पताल में युवक को अस्पताल में भर्ती नहीं किया. फिर परिजनों ने युवक को घर लाने की बात कही. लाखन सिंह को उसके साथियों ने उसके पैतृक गांव सेवा का पुरा पहुंचाया. जहां पर युवक के परिजनों ने झाड़-फूंक करने वाले तांत्रिकों को बुलाया और अपने ही घर पर उसका इलाज शुरू करा दिया. परिजनों ने युवक को अस्पताल ले जाने तक की जहमत नहीं उठाई.
युवक का उपचार नीम की पत्तियों द्वारा वायगीरों द्वारा झाड़ फूंक कर किया जाता रहा है. तांत्रिकों ने ढोलक, थाली और मजीरों द्वारा सर्प के जहर को कमजोर करने के लिए भजन भी गाए. मौके पर आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई. युवक के कान में वायगीर बार-बार आवाज लगाते रहे. लेकिन अचेत अवस्था में युवक की हालत लगातार नाजुक होती चली गई.
एक तरफ प्रशासन झाड़-फूंक करने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की बात कहता है. लेकिन दूसरी तरफ तांत्रिक लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है. 21वीं सदी के भारत में आज भी आस्था के नाम पर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. लेकिन प्रशासन और पुलिस के कानों तक जूं नहीं रेंग रही है. उधर गांव में अभी भी युवक का झाड़ फूंक द्वारा इलाज किया जा रहा है. जिसके चलते युवक की जान कभी भी जा सकती है.