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राजस्थान: कैबिनेट में 9 वैकेंसी-6 चाहते हैं पायलट, एडजस्टमेंट पर आलाकमान का मंथन

अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में 9 पद खाली हैं. इन पदों पर सचिन खेमे के अलावा 18 निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों की भी नजर है. कांग्रेस पार्टी किसी को भी नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती.

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सचिन पायलट और राहुल गांधी (फाइल फोटो)
सचिन पायलट और राहुल गांधी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राजस्थान कांग्रेस के संकट को निपटाना चाहता है नेतृत्व
  • पायलट को कांग्रेस में बड़ा पद देने की पेशकश हो सकती है
  • राजस्थान में खाली पड़े मंत्री पदों पर पायलट की नजर

सचिन पायलट पिछले 2 दिन से दिल्ली में हैं. कांग्रेस पार्टी उनकी मांगों को लेकर अभी मंथन मोड में नजर आ रही है. जितिन प्रसाद के जाने के बाद पार्टी हाईकमान पर राजस्थान की रार को सुलझाने की चुनौती आ खड़ी हुई है.

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अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में 9 पद खाली हैं. इन पदों पर सचिन खेमे के अलावा 18 निर्दलीय और बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों की भी नजर है. कांग्रेस पार्टी किसी को भी नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकती.

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सूत्रों के मुताबिक सभी गुटों को संतुष्ट करना आसान नहीं और उसके लिए फार्मूला तलाशा जा रहा है. कई ऐसे विधायक भी हैं जो 6-7 बार जीत चुके हैं उनकी भावनाओं को ठेस ना पहुंचे इस पर भी विचार विमर्श हो रहा है.

सचिन-पायलट और अशोक गहलोत के बीच चल रहे वर्चस्व के विवाद को सुलझाने की कमान अब खुद सोनिया गांधी ने अपने हाथ में ले ली है. सचिन पायलट जल्द ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से भी मुलाकात करने वाले हैं.

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सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट 9 में से लगभग 6-7 मंत्री पद चाहते हैं. सचिन चाहते हैं कि उनके विधायकों की अनदेखी ना हो और उनको राजस्थान सरकार में एडजस्ट किया जाए.

सचिन को कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन में कोई बड़ा पद मिल सकता है, उनको महासचिव भी बनाया जा सकता है. हालांकि सचिन ने यह साफ कह दिया है कि सबसे पहले उनके खेमे के विधायकों के साथ हो रहा बुरा बर्ताव और अनदेखी खत्म हो.

ऐसा भी बताया जा रहा है कि पायलट ने संगठन में महासचिव पद लेने से इंकार कर दिया है. लेकिन कांग्रेस चाहती है कि वे दिल्ली आकर केंद्र की राजनीति में सक्रिय हों ताकि राजस्थान सरकार का संकट टल सके.

 

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